scorecardresearch

ETF vs Mutual Fund: पैसा लगाने से पहले जानिए दोनों में क्या है अंतर

ईटीएफ और म्यूचुअल फंड दोनों ही निवेश के लोकप्रिय विकल्प हैं, लेकिन इनमें पैसा लगाने का तरीका काफी अलग है। आखिर किसमें निवेशकों को ज्यादा नियंत्रण मिलता है और कहां निवेश की जिम्मेदारी फंड मैनेजर संभालते हैं? शरद कोहली ने दोनों विकल्पों के बीच अहम अंतर समझाया है।

Advertisement

In Short

  • ETF और BEES में शेयरों की तरह बाजार के दौरान लाइव ट्रेडिंग की सुविधा मिलती है।
  • म्यूचुअल फंड में फंड मैनेजर निवेश संभालते हैं, जबकि ईटीएफ में निवेशकों को ट्रेडिंग का नियंत्रण मिलता है।
  • ईटीएफ और म्यूचुअल फंड में निवेश से जुड़े खर्च और खरीद-बिक्री का तरीका अलग होता है।

शेयर बाजार में निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों के सामने अक्सर यह सवाल आता है कि ETF में पैसा लगाना बेहतर है या म्यूचुअल फंड में। दोनों ही बाजार से जुड़े निवेश के विकल्प हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका काफी अलग है। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए KCC ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन शरद कोहली ने ETF, BEES और म्यूचुअल फंड के बीच अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि निवेशकों को अपनी जरूरत और निवेश करने के तरीके के हिसाब से विकल्प चुनना चाहिए।

advertisement

ETF में मिलती है लाइव ट्रेडिंग की सुविधा

शरद कोहली के मुताबिक, ETF और BEES को एक तरफ रखा जा सकता है, जबकि म्यूचुअल फंड का तरीका अलग है। ईटीएफ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शेयरों की तरह बाजार खुलने के दौरान लाइव ट्रेडिंग की जा सकती है।

इसका मतलब है कि निवेशक बाजार के कारोबारी समय में ईटीएफ खरीद और बेच सकते हैं। वहीं, म्यूचुअल फंड में निवेश की कीमत नेट एसेट वैल्यू के आधार पर तय होती है, जिसकी गणना कारोबारी सत्र के अंत में की जाती है।

म्यूचुअल फंड में कौन संभालता है आपका पैसा?

म्यूचुअल फंड में निवेशक अपना पैसा किसी स्कीम में लगाते हैं। इसके बाद एसेट मैनेजमेंट कंपनी के फंड मैनेजर और रिसर्च टीम उस पैसे को स्कीम के तय नियमों के मुताबिक निवेश करते हैं।

इसमें निवेशकों को खुद बाजार में सीधे ट्रेडिंग नहीं करनी पड़ती। हालांकि, उन्हें दिन के दौरान खरीद-बिक्री की कीमत पर ईटीएफ जैसा नियंत्रण नहीं मिलता।

दूसरी तरफ ETF और BEES के जरिए निवेशक किसी खास सेक्टर, थीम या मार्केट इंडेक्स में निवेश कर सकते हैं। साथ ही उन्हें एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की सुविधा भी मिलती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

ETF और म्यूचुअल फंड में खर्च का अंतर

शरद कोहली ने बताया कि निवेश के इन दोनों विकल्पों में लागत भी अहम भूमिका निभाती है। ईटीएफ में आमतौर पर एक्सपेंस रेशियो होता है।

वहीं, म्यूचुअल फंड में स्कीम के आधार पर एंट्री लोड या एग्जिट लोड जैसे शुल्क जुड़े हो सकते हैं। इसलिए निवेशकों को केवल रिटर्न नहीं, बल्कि निवेश करने और पैसा निकालने से जुड़े खर्च भी देखने चाहिए।

रिटेल निवेशकों के लिए क्या है बेहतर?

शरद कोहली के मुताबिक, ईटीएफ उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो बाजार में सक्रिय रहकर ट्रेडिंग करना चाहते हैं। वहीं, म्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, जो निवेश की जिम्मेदारी फंड मैनेजर को सौंपना चाहते हैं।

SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले कई नए निवेशक अब ETF और BEES जैसे विकल्पों की तरफ भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में निवेश का फैसला करते समय लिक्विडिटी, कीमत की पारदर्शिता, नियंत्रण और अपनी निवेश शैली को समझना जरूरी है।

advertisement

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।