पाकिस्तान के अस्पतालों में जल्द लग सकता है ताला
अस्पतालों में सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाला एनेस्थीसिया यानी बेहोशी की दवा का भी स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या आने वाले दिनों में ऑपरेशन थिएटरों में भी ताले लग जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में चल रहे आर्थिक संकट की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। यही कारण है कि अब मरीज जरूरी दवाओं के लिए भी जूझ रहे हैं।

पाकिस्तान के अस्पतालों में जल्द लग सकता है ताला
बदहाली से जूझ रही पाकिस्तान की शहबाज सरकार कंगाल ट्रॉफी जीतने के बेहद करीब है। आटा, दाल, चावल के बाद पाकिस्तान के कई शहरों की बिजली गुल हुईइसके बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में आग लगी और अब पाकिस्तान के अस्पतालों के ऑफरेशन थियेटर्स पर ताला लगने का खतरा मंडराने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अरब डॉलर से भी नीचे पहुंच चुका है और इसमें लगातार नीचे लुढ़कता जा रहा है। वहीं महंगाई की मार को देखें तो मुद्रास्फीति दर 40% के पार पहुंच चुकी है और लोगों की थाली से रोटी-दाल-चावल गायब होते जा रहे हैं। गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल तक के दाम आसमान पर पहुंच चुके हैं। इन सबके बीच अब पाकिस्तान में दवाओं का स्टॉक भी खत्म होता जा रहा है। जिसके चलते मरीजों को जरूरी दवाओं की कमी से जूझना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, अस्पतालों में सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाला एनेस्थीसिया यानी बेहोशी की दवा का भी स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या आने वाले दिनों में ऑपरेशन थिएटरों में भी ताले लग जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में चल रहे आर्थिक संकट की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। यही कारण है कि अब मरीज जरूरी दवाओं के लिए भी जूझ रहे हैं।
दरअसल, देश में विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के चलते जरूरी दवाओं और दवाओं के लिए कच्चा माल भी आयात नहीं किया जा रहा है। जिसकी वजह से पाकिस्तान में बनने वाली दवाईयों का उत्पादन भी कम हो गया है और इसका खामियाजा अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कमी के कारण डॉक्टर भी सर्जरी नहीं कर पा रहे हैं। बता दें ऑपरेशन थिएटरों में हार्ट, कैंसर और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के ऑपरेशन के लिए जरूरी एनेस्थीसिया का स्टॉक भी दो हफ्ते से भी कम का बचा है। माना जा रहा है कि अगर ऐसा ही रहा तो पाकिस्तान के अस्पतालों में काम करने वालों की नौकरी जाएगी। वहीं दवा बनाने वाली कंपनियों का आरोप है कि वाणिज्यिक बैंक उनके आयात के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट जारी नहीं कर रहा है। जिसके चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।
पाकिस्तान सरकार ने कॉस्ट कटिंग फॉर्मूला अपनाते हुए मंत्रियों और सलाहकारों से इकॉनोमी क्लास में यात्रा करने, लग्जरी कारों और वेतन भत्तों को छोड़ने का आदेश दिया है। इससे सरकार को दो सौ अरब रुपये सालाना की बचत होने का अनुमान है। सरकार की ओर से देश का खजाना बचाने के लिए जो उपाय किए जा रहे हैं। उससे आम जनता, सरकारी कर्मचारी और रईसों से लेकर पाकिस्तान की सेना तक पर असर पड़ा है।
