अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, होर्मुज संकट ने भारत की बढ़ाई चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने ग्लोबल ऑयल मार्केट की चिंता बढ़ा दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार पहुंच गया। भारत में भी क्रूड बास्केट की कीमत चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंची है।

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होने के बीच ब्रेंट क्रूड 10 सितंबर को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह जुलाई के बाद पहली बार है जब ब्रेंट इस स्तर पर आया है।
ब्रेंट क्रूड 101.21 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क WTI 96.05 डॉलर पर रहा। हमलों में तेल ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाए जाने से बाजार को आगे सप्लाई बाधित होने की आशंका है। भारत के लिए चिंता और बढ़ गई है। भारतीय क्रूड बास्केट बुधवार को 109 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो चार महीने का उच्च स्तर है।
होर्मुज में रुकावट से बढ़ी चिंता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के समुद्री पेट्रोलियम कारोबार का करीब पांचवां हिस्सा संभालता है। यहां टैंकरों की आवाजाही सीमित रहने से वैश्विक तेल वितरण पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के नए अनुमान के मुताबिक, आवाजाही में लंबे समय तक रुकावट रहने पर साल के अंत तक रोजाना लाखों बैरल तेल की सप्लाई बंद रह सकती है।
तेल की कीमतों में उछाल ऐसे समय आया है जब वैश्विक भंडार उम्मीद से ज्यादा तेजी से घट रहे हैं। शिपिंग कंपनियों को लंबे वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं और बीमा कंपनियों ने होर्मुज को हाई-रिस्क जोन माना है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ गया है।
ट्रंप बोले, चुनाव के बाद गिरेंगी कीमतें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को माना कि संघर्ष की वजह से बढ़ी ऊर्जा कीमतें अमेरिकी मिड टर्म चुनाव से पहले कम होने की संभावना नहीं है। ट्रंप ने कहा कि चुनाव के तुरंत बाद तेल की कीमतें तेजी से नीचे जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें मिड टर्म चुनाव तक से ज्यादा समय लग सकता है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे नौसैनिक नाकाबंदी और आर्थिक युद्ध का विस्तार बताया है। तेहरान ने अपने जवाबी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जायज बताया और चेतावनी दी कि लगातार आक्रामक कार्रवाई क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है।

