scorecardresearch

UPI Charges पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रोक लगाने से इनकार; क्या आपकी जेब पर पड़ेगा असर?

UPI से ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर MDR लगाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने फिलहाल इस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, सरकार, RBI और NPCI से जवाब मांगा गया है। जानिए किन ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगेगा और किसे राहत मिलेगी।

Advertisement

In Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगाने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया।
  • अदालत ने केंद्र सरकार, RBI और NPCI को नोटिस जारी कर MDR लगाने का कानूनी आधार स्पष्ट करने को कहा।
  • नए नियम के तहत चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा, जबकि छोटे और P2P ट्रांजैक्शन इससे बाहर रहेंगे।

UPI के जरिए ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करने पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने फिलहाल इस चार्ज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई की। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।

कोर्ट में ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही सरकार, RBI और NPCI से पूछा कि इस चार्ज को लगाने का कानूनी आधार क्या है।

सरकार ने कहा- MDR कोई टैक्स या फीस नहीं

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि UPI पर लगने वाला MDR न तो कोई टैक्स है और न ही सरकारी फीस।

उनके मुताबिक, 96 फीसदी गेटवे यूजर्स इस नियम से बाहर हैं। जरूरी सेवाओं के मामले में चार्ज की अधिकतम सीमा ₹5 रखी गई है।

उन्होंने बताया कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड से ट्रांजैक्शन करने में भी खर्च आता है। UPI के मामले में भी बैंक और दूसरे ऑपरेटर सेवाएं देते हैं। MDR इन संस्थाओं के बीच सेटलमेंट चार्ज है, जिसे NPCI की मदद से पूरा किया जाता है। इससे सरकार को कोई पैसा नहीं मिलता।

प्रतीकात्मक तस्वीर

जज ने पूछा- फीस नहीं तो आखिर क्या है MDR?

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सवाल उठाया कि अगर MDR फीस नहीं है, तो इसे क्या माना जाए? उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों पर एक फीसदी चार्ज लगाने का मुद्दा भी उठाया।

वहीं, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सरकार से कहा कि वह अपनी सभी दलीलें हलफनामे पर पेश करे। उन्होंने इस मामले को मुख्य रूप से तकनीकी मुद्दा बताया।

₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर कितना लगेगा चार्ज?

सरकार ने करीब छह साल से पूरी तरह मुफ्त चल रहे UPI पेमेंट सिस्टम में बदलाव करते हुए 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगाने का फैसला किया है।

advertisement

हालांकि, आम लोगों के बीच होने वाले पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन और छोटे पेमेंट इस चार्ज से बाहर रहेंगे।

₹75,000 या उससे ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है।

इन सेक्टरों के लिए अलग नियम

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती से जुड़े जरूरी सामान जैसे सेक्टरों में ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर फ्लैट ₹5 MDR लगेगा।

वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर या डीलर के जरिए होने वाले पेमेंट पर 0.02 फीसदी MDR लागू होगा। इसकी अधिकतम सीमा भी ₹300 रखी गई है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने MDR लागू करने पर रोक नहीं लगाई है। अब केंद्र सरकार, RBI और NPCI को इस चार्ज के कानूनी आधार पर अपना जवाब देना होगा।