Coal Crisis: तेजी से घट रहा कोयले का स्टॉक, थर्मल पावर प्लांट्स के पास सिर्फ 7 दिन का भंडार
देश के थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक तेजी से घट रहा है। करीब 60 प्रतिशत प्लांट में सात दिन से भी कम कोयला बचा है। सितंबर में बिजली की मांग बढ़ने से सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। सरकार ने कोयले की आपूर्ति तेज करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या बिजली सप्लाई प्रभावित होगी?

In Short
- देश के 60% थर्मल पावर प्लांट में सात दिन से कम कोयला बचा है।
- सितंबर में बिजली की अधिकतम मांग 271 GW तक पहुंच गई।
- सरकार ने कोयला कंपनियों को सप्लाई बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
देश के थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक तेजी से घट रहा है। National Coal Portal के मुताबिक, देश के 190 थर्मल पावर प्लांट में औसतन सिर्फ सात दिन का कोयला बचा है। यह नवंबर 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है। करीब 60 प्रतिशत पावर प्लांटों में सात दिन से भी कम का कोयला मौजूद है।
सितंबर में बिजली की मांग बढ़ने से कोयले की खपत भी बढ़ गई है। हालांकि, मौजूदा स्थिति की मुख्य वजह कोयले की कुल उपलब्धता में कमी के बजाय उसकी सप्लाई और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी दिक्कतें मानी जा रही हैं।
सरकार ने कोयले की सप्लाई बढ़ाने को कहा
कोयले के घटते स्टॉक को देखते हुए कोयला मंत्रालय ने Coal India Limited और Singareni Collieries Company समेत सरकारी कोयला कंपनियों को थर्मल पावर प्लांट तक सप्लाई बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
Central Electricity Authority यानी CEA के मुताबिक, जब किसी पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक तय सामान्य स्तर से 25 प्रतिशत नीचे चला जाता है, तो उसे गंभीर स्थिति माना जाता है।
फिलहाल पावर प्लांट में औसतन सात दिन का कोयला है, जबकि ऐतिहासिक औसत 16 से 18 दिन का रहा है।
सितंबर में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर
सितंबर में बिजली की अधिकतम मांग 271 गीगावाट (GW) तक पहुंच गई, जो इस महीने के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
कई इलाकों में सामान्य से कम मानसूनी बारिश के कारण बिजली की मांग बढ़ी है। अप्रैल से अगस्त के बीच थर्मल पावर प्लांट में कोयले की खपत सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़कर 395 मिलियन टन हो गई।
Crisil Intelligence के मुताबिक, इस दौरान बिजली की मांग 9.5 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, जून से अगस्त के बीच बारिश लंबी अवधि के औसत से 13 प्रतिशत कम रही।
कोयला पहुंचाने में कहां आ रही है दिक्कत?
अप्रैल से अगस्त के बीच रेलवे रेक की लोडिंग सिर्फ 5 प्रतिशत और पावर प्लांट तक कोयले की प्राप्ति 3 प्रतिशत बढ़ी। इसके मुकाबले कोयले की खपत तेजी से बढ़ी।
स्थिति सुधारने के लिए Coal India ने 7 सितंबर से फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट वाले पावर प्लांट को रेल के अलावा सड़क मार्ग से भी अतिरिक्त कोयला उठाने की अनुमति दी है।
सरकार ने Electricity Act की धारा 11 के तहत 50 MW से ज्यादा क्षमता वाले कैप्टिव पावर प्लांट को अक्टूबर से दिसंबर तक अपनी अधिकतम उपलब्ध क्षमता पर चलाने का निर्देश भी दिया है।
क्या बिजली संकट का खतरा है?
मौजूदा आंकड़े कोयले के स्टॉक पर दबाव दिखाते हैं, लेकिन इससे देशव्यापी बिजली कटौती होना तय नहीं है। कोयला उत्पादकों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। मुख्य चुनौती इसे समय पर पावर प्लांट तक पहुंचाने की है।
अनुमान है कि बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी 65 से 70 प्रतिशत बनी रहेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में कोयले की सप्लाई और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में सुधार अहम होगा।

