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Insurance खरीदना होगा सस्ता? IRDAI के नए प्रस्ताव से बदल सकता है Premium का गणित

इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने वालों के लिए IRDAI का नया प्रस्ताव कई बड़े बदलाव ला सकता है। कंपनियों के खर्च और कमीशन पर लगाम लगाने की तैयारी है, लेकिन क्या इससे आपका प्रीमियम भी घटेगा? एक्सपर्ट्स ने कुछ ऐसी आशंकाएं जताई हैं, जो पॉलिसी खरीदने से पहले जानना जरूरी है।

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In Short

  • IRDAI का नया प्रस्ताव: इंश्योरेंस कंपनियों के खर्च और डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन पर सख्त सीमा लगाने की तैयारी।
  • क्या सस्ता होगा प्रीमियम? कमीशन घटने से बीमा की लागत कम हो सकती है, लेकिन ग्राहकों को सीधे फायदा मिलने की गारंटी नहीं।
  • छोटी पॉलिसियों पर असर: कमीशन में बदलाव से कम प्रीमियम वाली पॉलिसियों और छोटे शहरों में बीमा वितरण पर असर पड़ने की आशंका।

इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इंश्योरेंस कंपनियों के खर्च और पॉलिसी बेचने पर मिलने वाले कमीशन को लेकर नए प्रस्ताव रखे हैं। इससे बीमा की लागत कम हो सकती है। हालांकि, इसका फायदा ग्राहकों को सस्ते प्रीमियम के रूप में मिलेगा या नहीं, यह अभी साफ नहीं है।

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कमीशन घटने से सस्ता होगा इंश्योरेंस?

IRDAI ने अपने कंसल्टेशन पेपर में कंपनियों के खर्च और डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन पर सख्त सीमा लगाने का प्रस्ताव दिया है। दरअसल, पॉलिसी बेचने और ग्राहकों तक पहुंचाने में कंपनियों को काफी खर्च करना पड़ता है। लेकिन कमीशन घटने का मतलब यह नहीं कि प्रीमियम भी तुरंत कम हो जाएगा। कंपनियां बची रकम टेक्नोलॉजी, क्लेम प्रोसेसिंग और कस्टमर सर्विस पर खर्च कर सकती हैं।

लाइफ इंश्योरेंस के लिए क्या है प्रस्ताव?

IRDAI ने लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) को ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम (GDPI) से जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत खर्च की सीमा दो साल में 15 फीसदी और पांच साल में 12.5 फीसदी तक लाई जा सकती है। कुछ कंपनियों के लिए पांच साल में 10 फीसदी का लक्ष्य भी प्रस्तावित है।

जनरल इंश्योरेंस में क्या बदलेगा?

जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए EoM की सीमा दो साल में 25 फीसदी और पांच साल में 20 फीसदी करने का प्रस्ताव है। साथ ही अलग-अलग इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन की अलग सीमाएं तय की जा सकती हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

ग्राहकों को कितनी बचत होगी?

InsuranceDekho के इंद्रनील चटर्जी के मुताबिक खर्च घटने से प्रीमियम कम होने की गुंजाइश है, लेकिन ग्राहकों को कितनी बचत होगी, यह अभी तय नहीं है। वहीं, Insurance Samadhan की शिल्पा अरोड़ा का कहना है कि कमीशन घटने से प्रीमियम अपने आप सस्ता नहीं होगा।

छोटी पॉलिसी वालों पर क्या असर?

कम कीमत वाली पॉलिसियों पर कमीशन घटने से डिस्ट्रीब्यूटर्स ज्यादा कीमत वाली पॉलिसियों पर ध्यान दे सकते हैं। इससे छोटे शहरों और कम प्रीमियम वाली पॉलिसियों की बिक्री प्रभावित होने की आशंका है।

CoverSure के सौरभ विजयवर्गीय के मुताबिक कंपनियां बची रकम का इस्तेमाल क्लेम प्रोसेसिंग और दूसरी सेवाएं बेहतर बनाने में भी कर सकती हैं।

पॉलिसी खरीदते समय क्या ध्यान रखें?

ग्राहकों को सिर्फ कम प्रीमियम नहीं, बल्कि कवरेज, एक्सक्लूशन्स, क्लेम सपोर्ट और रिन्यूअल की शर्तें भी देखनी चाहिए। प्रस्ताव में कमीशन को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की बात भी कही गई है।

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कब लागू होंगे नए नियम?

फिलहाल ये सिर्फ प्रस्ताव हैं। IRDAI ने 25 अक्टूबर 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद अंतिम नियम तय होंगे। ऐसे में इंश्योरेंस कितना सस्ता होगा, यह अंतिम नियमों और कंपनियों के फैसलों पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।