
N Chandrasekaran के बाद Tata Group को नया चेयरमैन मिलना मुश्किल, Trust से जुड़े नियमों ने रोकी प्रक्रिया
टाटा संस में नए चेयरमैन की तलाश फिलहाल अटक गई है। नियमों से जुड़ी एक अड़चन के कारण Sir Ratan Tata Trust सर्च पैनल में अपना प्रतिनिधि नहीं चुन पा रहा है। N Chandrasekaran का कार्यकाल फरवरी में खत्म होगा, ऐसे में नए नेतृत्व को लेकर इंतजार बढ़ता जा रहा है।

In Short
- Tata Sons के नए चेयरमैन की तलाश फिलहाल नियमों से जुड़ी अड़चन के कारण रुकी हुई है।
- Tata Trusts ने महाराष्ट्र Charity Commissioner से SRTT को सर्च पैनल में प्रतिनिधि नियुक्त करने की अनुमति मांगी है।
- N Chandrasekaran का कार्यकाल फरवरी में खत्म होगा, जिससे Tata Group में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
टाटा ग्रुप में नए चेयरमैन की तलाश फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रही है, जबकि एन. चंद्रशेखरन को अपने पद से हटने का ऐलान किए दो हफ्ते से ज्यादा हो चुके हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले ट्रस्ट से जुड़ी एक नियामकीय अड़चन के कारण उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया अटक गई है।
Sir Ratan Tata Trust की बैठक पर रोक
रिपोर्ट के मुताबिक, Sir Ratan Tata Trust यानी SRTT उन 13 चैरिटेबल ट्रस्टों में से एक है, जो मिलकर Tata Sons Pvt. में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। फिलहाल चल रही एक जांच से जुड़ी पाबंदियों के कारण SRTT को आंतरिक बैठकें करने की अनुमति नहीं है।
इसी वजह से SRTT पांच सदस्यों वाले संयुक्त सर्च पैनल में अपना प्रतिनिधि नामित नहीं कर पा रहा है। इससे नए चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
Charity Commissioner से मांगी गई अनुमति
मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, Tata Trusts ने महाराष्ट्र के Charity Commissioner से SRTT को सर्च पैनल में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की अनुमति देने को कहा है।
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यह सर्च पैनल Sir Dorabji Tata Trust की ओर से घोषित किया गया था। Tata Trusts मिलकर Tata Sons में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, इसलिए इस प्रक्रिया में उनकी भूमिका काफी अहम है।
चंद्रशेखरन फरवरी में छोड़ेंगे पद
एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को चौंकाते हुए घोषणा की थी कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने के बाद दूसरा कार्यकाल नहीं मांगेंगे। उनका कार्यकाल फरवरी में समाप्त होगा।

उनके इस फैसले के बाद टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे यह भी सामने आया कि भारत का सबसे पुराना कारोबारी समूह उत्तराधिकार की प्रक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार नहीं था।
Noel Tata पर बढ़ सकता है दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि चंद्रशेखरन और Tata Trusts के प्रमुख Noel Tata के बीच चल रही शक्ति खींचतान के बीच यह स्थिति और जटिल हो गई है।
टाटा समूह की जटिल ownership structure को लेकर भी पहले से governance और transparency से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। नए चेयरमैन की तलाश में और देरी होती है तो Noel Tata पर निवेशकों, नियामकों और नीति निर्माताओं को भरोसा दिलाने का दबाव बढ़ सकता है।
यह दबाव इसलिए भी अहम है क्योंकि टाटा समूह की भूमिका भारत की manufacturing और technology ambitions में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस मामले पर Tata Sons और Tata Trusts के प्रतिनिधियों ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
