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बाढ़ से बदल रहा भारत का रियल एस्टेट बाजार, निवेशक अब Climate Risk देख कर तय कर रहे हैं प्रॉपर्टी की कीमत

भारत के रियल एस्टेट बाजार में अब लोकेशन और कीमत के साथ बाढ़ से सुरक्षा भी निवेश का अहम पैमाना बन रही है। बड़े निवेशक ड्रेनेज सिस्टम और फ्लड प्रोटेक्शन पर पैसा लगा रहे हैं। इससे प्रॉपर्टी की कीमत से लेकर बीमा लागत तक का गणित बदल रहा है।

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AI Generated Image

In Short

  • भारत के रियल एस्टेट में अब flood protection और climate resilience निवेश का अहम पैमाना बन रहे हैं।
  • Brookfield, Blackstone और DLF जैसी कंपनियां drainage, flood barriers और infrastructure upgrades पर खर्च बढ़ा रही हैं।
  • बाढ़ का जोखिम संपत्ति की कीमत, बीमा की लागत और खरीदारों की पसंद तक को प्रभावित कर रहा है।

भारत के बड़े शहरों में बाढ़ और तेज बारिश अब सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या नहीं रही, बल्कि रियल एस्टेट निवेश का अहम जोखिम बन गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, बड़े निवेशक अब प्रॉपर्टी खरीदने या विकसित करने से पहले यह देख रहे हैं कि वह बाढ़, तूफान और भारी बारिश जैसी स्थितियों का कितना सामना कर सकती है।

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मुंबई के Mithi River के किनारे बना Equinox Business Park इसका बड़ा उदाहरण है। यह इलाका कई साल तक बाढ़ से प्रभावित रहा और पार्क की occupancy सिर्फ 16% के आसपास थी। 2018 में Brookfield Asset Management ने इसे खरीदा और करीब 26 मिलियन डॉलर खर्च कर निचले हिस्सों को ऊंचा किया, flood defenses मजबूत किए और drainage system को बेहतर बनाया।

Equinox की occupancy 99% के पार

इन बदलावों के बाद Equinox में हालात पूरी तरह बदल गए। आज यहां Leela Palaces Hotels & Resorts का corporate headquarters और State Street जैसी कंपनियां मौजूद हैं और occupancy 99% से ज्यादा है।

पिछले साल Brookfield ने Equinox की 97% हिस्सेदारी Singapore के sovereign wealth fund GIC को बेची। इस डील में office park की valuation करीब 40 अरब रुपये यानी लगभग 420 मिलियन डॉलर रही। रिपोर्ट के मुताबिक, Brookfield के निवेशकों ने अपनी equity value तीन गुना से ज्यादा बढ़ाई।

Climate Risk बना निवेश का नया पैमाना

भारत का रियल एस्टेट बाजार करीब 300 अरब डॉलर का है। अब मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे शहरों में निवेशक जल निकासी व्यवस्था, बाढ़ से बचाव के उपाय और आसपास के बुनियादी ढांचे पर पैसा खर्च कर रहे हैं।

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ब्रुकफील्ड के अर्पित अग्रवाल के मुताबिक, कंपनी ने एक संभावित डेटा सेंटर की जगह पर बाढ़ के जोखिम का अध्ययन कराया था। अध्ययन के नतीजों के बाद कंपनी ने डेटा सेंटर के लिए दूसरी जगह चुनने का फैसला किया।

Chennai और Bengaluru में भी बढ़ी तैयारी
चेन्नई में डीएलएफ ने जरूरी बिजली से जुड़े सिस्टम को जमीन के स्तर से ऊपर शिफ्ट किया है। कंपनी ने जल निकासी व्यवस्था और वर्षा जल संचयन के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

बेंगलुरु में सत्वा ग्रुप और ब्लैकस्टोन ने ग्लोबल सिटी परिसर में बाढ़ और मिट्टी के पैटर्न का अध्ययन किया। यहां जमीन का स्तर ऊंचा किया गया, बड़े वर्षा जल टैंक बनाए गए और ज्यादा क्षमता वाले पंप लगाए गए।

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इन उपायों से विकास लागत 100 से 200 रुपये प्रति वर्ग फुट बढ़ी है। सत्वा का अनुमान है कि कुल 1.2 अरब से 2.4 अरब रुपये तक अतिरिक्त खर्च हो सकता है।

बीमा और प्रॉपर्टी की कीमतों पर भी असर

Climate risk अब insurance cost को भी प्रभावित कर रहा है। कंपनियां flood risk के हिसाब से policy की cost और terms तय कर रही हैं।

Residential market में भी इसका असर दिख रहा है। Mumbai के flood-prone इलाकों में घर करीब 15,000 रुपये प्रति square foot में बिक सकते हैं, जबकि कम जोखिम वाले comparable areas में कीमत करीब 40,000 रुपये प्रति square foot तक हो सकती है।

Sanghvi Realty ने Mumbai के एक residential project की foundation छह फीट ऊंची की और waterproofing व pumps लगाए। इससे construction cost करीब 20% बढ़ी, लेकिन कंपनी को उम्मीद थी कि बेहतर flood protection से खरीदार ज्यादा कीमत देने को तैयार होंगे।