
AI की बढ़ती भूख से Data Center बूम, 2050 तक दुनिया में $31.6 ट्रिलियन का निवेश, भारत-चीन होंगे बड़े ड्राइवर
AI की बढ़ती मांग दुनिया में डेटा सेंटर निवेश का नया रिकॉर्ड बना सकती है। PwC के मुताबिक, 2050 तक इस सेक्टर में 31.6 ट्रिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है। भारत और चीन मांग बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन बिजली और सेमीकंडक्टर सप्लाई अहम चुनौती रहेंगी।

In Short
- PwC के मुताबिक 2050 तक ग्लोबल डेटा सेंटर पर कुल खर्च 31.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
- AI की बढ़ती मांग के चलते GPU सर्वर स्टोरेज और नेटवर्किंग हार्डवेयर पर सबसे ज्यादा निवेश होने का अनुमान है।
- भारत और चीन अतिरिक्त मांग का बड़ा हिस्सा पैदा कर सकते हैं जबकि बिजली और सेमीकंडक्टर सप्लाई बड़ी चुनौती रहेंगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती मांग आने वाले दशकों में डेटा सेंटर इंडस्ट्री में रिकॉर्ड निवेश करा सकती है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, PricewaterhouseCoopers यानी PwC का अनुमान है कि साल 2050 तक दुनिया भर में डेटा सेंटर पर कुल खर्च 31.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
PwC ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर AI का इस्तेमाल उसके मौजूदा अनुमान से भी तेज बढ़ता है तो अगले करीब ढाई दशकों में यह खर्च 50 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। तुलना के लिए, अमेरिका की GDP करीब 30 ट्रिलियन डॉलर है।
AI की बढ़ती मांग से तेज होगा निवेश
कंज्यूमर्स, कंपनियों और सरकारों के बीच AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी वजह से Microsoft और Amazon जैसी बड़ी टेक कंपनियां और छोटे डेटा सेंटर प्रोवाइडर दुनिया भर में नई कंप्यूटिंग फैसिलिटी तैयार कर रहे हैं।
इस निवेश का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर की इमारत या जमीन पर नहीं, बल्कि उनके अंदर इस्तेमाल होने वाले हार्डवेयर पर खर्च होगा। इसमें Nvidia जैसी कंपनियों के AI चिप्स, GPU, सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और नेटवर्किंग इक्विपमेंट शामिल हैं।
हर कुछ साल में बदलना होगा हार्डवेयर
PwC के मुताबिक, डेटा सेंटर पर खर्च लगातार बढ़ने की एक बड़ी वजह हार्डवेयर का नियमित अपग्रेड होगा। GPU, सर्वर और चिप्स को समय-समय पर बदलना पड़ेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे, बिजली और इंटरनेट जैसी पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांतियों में शुरुआती दौर में बड़ा निवेश होता था। लेकिन AI इंफ्रास्ट्रक्चर में हर चार से छह साल में नई तकनीक के साथ निवेश का नया चक्र शुरू हो सकता है।
सालाना खर्च 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है
PwC के अनुमान के अनुसार, इस साल ग्लोबल डेटा सेंटर खर्च करीब 800 अरब डॉलर है। यह 2030 तक बढ़कर 1.1 ट्रिलियन डॉलर और 2050 तक 1.8 ट्रिलियन डॉलर सालाना पहुंच सकता है।
क्षेत्र के हिसाब से देखें तो अमेरिका सबसे ज्यादा निवेश हासिल कर सकता है। वहां 2050 तक करीब 15.1 ट्रिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसके बाद Asia-Pacific में 8.2 ट्रिलियन डॉलर, Europe में 5.6 ट्रिलियन डॉलर, Middle East में 1.1 ट्रिलियन डॉलर और Africa में 255 अरब डॉलर खर्च हो सकता है।
भारत और चीन से बढ़ेगी मांग
PwC की रिपोर्ट में कहा गया है कि अतिरिक्त मांग में भारत और चीन की बड़ी हिस्सेदारी हो सकती है। दोनों देशों की बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी और बिजनेस व कंज्यूमर गतिविधियों में AI के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ सकती है।
बिजली बनेगी सबसे बड़ी चुनौती
PwC का कहना है कि डेटा सेंटर निवेश किस देश या क्षेत्र में जाएगा, इसमें बिजली की उपलब्धता सबसे अहम भूमिका निभाएगी। सस्ती, भरोसेमंद और कम कार्बन वाली बिजली उपलब्ध कराना कई बाजारों के लिए बड़ी चुनौती है।

इसके अलावा सेमीकंडक्टर सप्लाई में बाधा आने पर ग्लोबल निवेश करीब 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वहीं, डेटा सोवरेनिटी से जुड़े नियम निवेश को कम करने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में बांट सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस साल की पहली तिमाही में स्थानीय विरोध के कारण करीब 130 अरब डॉलर के कम से कम 75 डेटा सेंटर प्रोजेक्ट या तो रुके या उनमें देरी हुई।
