RBI की MPC बैठक शुरू, रेपो रेट पर क्या होगा फैसला? महंगाई, रुपये और होम लोन पर टिकी निगाहें
RBI की MPC बैठक शुरू हो गई है और इस बार फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। महंगाई, क्रूड ऑयल और रुपये पर दबाव के बीच क्या RBI रेपो रेट में बदलाव करेगा या राहत देगा? एक्सपर्ट्स की राय और होम लोन लेने वालों पर इसके असर को समझिए पूरी खबर में।

In Short
- RBI MPC बैठक में 72 में से 68 इकोनॉमिस्ट्स ने रेपो रेट को स्थिर रखने की उम्मीद जताई, लेकिन महंगाई को लेकर RBI का रुख अहम रहेगा।
- जून में रिटेल महंगाई 4.38% और होलसेल महंगाई 9.87% पहुंचने के बाद क्रूड ऑयल और इम्पोर्टेड महंगाई की चिंता बढ़ी है।
- रेपो रेट स्थिर रहने पर होम लोन की ब्याज दरों और EMI पर राहत मिल सकती है, जिससे हाउसिंग सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिन की बैठक आज से शुरू हो गई है। दुनियाभर में बढ़ती महंगाई, महंगा क्रूड ऑयल और कई देशों में बढ़ती ब्याज दरों के बीच सबकी नजर RBI के फैसले पर है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार भी RBI रेपो रेट में बदलाव नहीं करेगा। अब सवाल है कि जब कई देश रेट बढ़ा रहे हैं तो भारत अलग रास्ता क्यों अपना रहा है।
RBI क्यों रख सकता है रेपो रेट में बदलाव से दूरी?
रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक 72 में से 68 इकोनॉमिस्ट्स को उम्मीद है कि RBI इस हफ्ते ब्याज दरों को स्थिर रखेगा। बुधवार को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा पॉलिसी का ऐलान करेंगे। हालांकि, रेट बढ़ाने की संभावना कम है, लेकिन RBI महंगाई को लेकर अपना रुख थोड़ा सख्त कर सकता है।
भारत में खुदरा महंगाई जून में बढ़कर 4.38% पहुंच गई है। यह 17 महीनों में पहली बार RBI के 4% टारगेट से ऊपर गई है। फिर भी यह RBI की 2% से 6% वाली लिमिट के अंदर बनी हुई है। वहीं कोर महंगाई करीब 4% के आसपास है, जिससे RBI को तुरंत ब्याज दर बढ़ाने की जरूरत नहीं दिख रही है।
ग्लोबल दबाव के बावजूद भारत की स्थिति अलग क्यों?
ईरान से जुड़े अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बाद कई देशों ने महंगाई के खतरे को देखते हुए ब्याज दरें बढ़ाई हैं। यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, साउथ कोरिया और साउथ अफ्रीका जैसे देशों ने रेट बढ़ाने का फैसला लिया है।
वहीं अमेरिका का फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान ने अभी तक ब्याज दरों को स्थिर रखा है। भारत की स्थिति फिलहाल बेहतर मानी जा रही है क्योंकि महंगाई RBI की तय सीमा में है और कोर महंगाई भी कंट्रोल में बनी हुई है।
महंगाई और क्रूड ऑयल से बढ़ सकती है RBI की चिंता
हालांकि RBI इस बार रेट नहीं बढ़ा सकता, लेकिन बढ़ते जोखिमों को लेकर उसका रुख बदल सकता है। जून में होलसेल महंगाई 9.87% तक पहुंच गई है। इसके अलावा मई में RBI के सर्वे में सामने आया कि लोगों की महंगाई को लेकर उम्मीदें भी बढ़ रही हैं।
गल्फ क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत में इम्पोर्टेड महंगाई का खतरा बढ़ सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले 3 से 4 महीनों में होलसेल प्राइस का असर रिटेल महंगाई पर दिख सकता है।
रुपये पर दबाव भी RBI के लिए बड़ी चुनौती
RBI के सामने रुपये को संभालने की चुनौती भी बनी हुई है। जून की पॉलिसी से पहले भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। कुछ इकोनॉमिस्ट्स ने रुपये को सपोर्ट देने के लिए ब्याज दर बढ़ाने की सलाह दी थी।
हालांकि RBI ने रेट बढ़ाने के बजाय विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कदम उठाए। इनमें विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड पर कैपिटल गेन्स टैक्स हटाना और NRI के लिए डॉलर डिपॉजिट स्कीम को आकर्षक बनाना शामिल था। इन उपायों से करीब 40 अरब डॉलर का इनफ्लो आया, जिससे रुपये को कुछ राहत मिली।
होम लोन लेने वालों को मिल सकती है राहत
अगर RBI रेपो रेट को स्थिर रखता है तो इसका सीधा फायदा होम लोन लेने वालों को मिल सकता है। ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने से लोन की EMI पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और खरीदारों को राहत मिलेगी।
रियल एस्टेट सेक्टर के एक्सपर्ट्स का कहना है कि कम होम लोन रेट, बेहतर अफोर्डेबिलिटी और मजबूत कंज्यूमर कॉन्फिडेंस से हाउसिंग डिमांड को सपोर्ट मिल रहा है। ऐसे समय में पॉलिसी में स्थिरता सेक्टर के लिए फायदेमंद हो सकती है।
RBI के फैसले में इन तीन बातों पर रहेगी नजर
मार्केट की नजर सिर्फ रेपो रेट पर नहीं होगी, बल्कि RBI के कमेंट्स पर भी रहेगी। निवेशक देखेंगे कि महंगाई को लेकर RBI कितना सख्त रुख अपनाता है, क्रूड ऑयल से जुड़े खतरे पर क्या कहता है और भविष्य में ब्याज दर बढ़ाने को लेकर कोई संकेत देता है या नहीं।
ग्लोबल सेंट्रल बैंक जहां धीरे-धीरे सख्त रुख अपना रहे हैं, वहीं RBI इस बार इंतजार और आंकड़ों के आधार पर फैसला लेने की रणनीति अपना सकता है।

