दुनिया के देशों से व्यापार बढ़ाने के लिए भारत नहीं करेगा इंतजार! निर्मला सीतारमण ने बताया क्या है सरकार का प्लान
भारत दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए अपनी रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत कई देशों के साथ मिलकर काम करने में विश्वास रखता है, लेकिन इसके लिए इंतजार नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि सरकार द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को तेजी से आगे बढ़ा रही है। आखिर भारत की इस रणनीति के पीछे क्या वजह है?

In Short
- भारत बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था का समर्थन करता रहेगा।
- अलग-अलग देशों के साथ सीधे व्यापार समझौतों पर जोर।
- पुराने व्यापार समझौतों को तेजी से पूरा करने की तैयारी।
भारत दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने पर तेजी से काम कर रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत कई देशों के साथ मिलकर काम करने की व्यवस्था में विश्वास रखता है, लेकिन इसके लिए इंतजार नहीं करेगा। भारत अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए अलग-अलग देशों के साथ सीधे व्यापार समझौते भी कर रहा है।
भारत की व्यापार नीति को लेकर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
बैंकॉक में आयोजित 2026 IMF-World Bank की सालाना बैठकों के दौरान अटलांटिक काउंसिल के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन से बातचीत की।
सीतारमण ने कहा कि भारत बहुपक्षीय व्यवस्था यानी कई देशों के साथ मिलकर काम करने की प्रणाली को मजबूत करना चाहता है। लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर भी जोर दे रहा है।
द्विपक्षीय समझौते का मतलब है दो देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए किया गया समझौता।
किन देशों के साथ व्यापार बढ़ा रहा भारत?
वित्त मंत्री ने बताया कि भारत यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ बड़े व्यापार समझौते पर काम कर रहा है। इसके अलावा न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और EFTA देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कनाडा के साथ जारी बातचीत का भी जिक्र किया।
सीतारमण के मुताबिक, भारत की कोशिश दुनिया के ज्यादा से ज्यादा देशों और आर्थिक क्षेत्रों के साथ व्यापारिक समझौते करने की है, ताकि कारोबार के नए अवसर पैदा हो सकें।
पुराने समझौतों को तेजी से पूरा करने पर जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि कई देशों के साथ व्यापार समझौतों पर लंबे समय से बातचीत चल रही थी, लेकिन अब इन्हें तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
उनके मुताबिक, दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति से इन समझौतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय मुश्किल आर्थिक हालात से गुजर रही है। ऐसे में देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत होने से कारोबार को सहारा मिल सकता है।
भारत को क्या होगा फायदा?
सीतारमण ने कहा कि भारत बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था का समर्थन जारी रखेगा, लेकिन साथ ही अलग-अलग देशों के साथ सीधे समझौते भी करता रहेगा।
उनके मुताबिक, इस रणनीति से भारत को फायदा हुआ है और व्यापारिक साझेदार देशों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। भारत का मकसद दुनिया के ज्यादा से ज्यादा बाजारों से जुड़ना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करना है।

