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भारत में सोने की तस्करी में भारी उछाल! तीन महीने में 50 टन सोना अवैध रास्तों से आया

भारत में सोने की तस्करी तेजी से बढ़ रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट में अवैध रास्तों से सोने के आयात को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आखिर सरकारी टैक्स बढ़ने के बाद सोने के बाजार में क्या बदलाव आया और ज्वेलर्स खरीदारी से क्यों बच रहे हैं?

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In Short

  • भारत में जुलाई से सितंबर के बीच अवैध रास्तों से सोने का आयात 1,500% से ज्यादा बढ़ा।
  • सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15% करने के बाद अनौपचारिक कारोबार में तेजी आई।
  • अक्टूबर में सोने की कीमतों में 6.8% की गिरावट आई, ज्वेलर्स को और सस्ता होने की उम्मीद।

भारत में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद अवैध रास्तों से सोना लाने के मामलों में जबरदस्त उछाल आया है। जुलाई से सितंबर के बीच बिना आधिकारिक रास्तों से आने वाले सोने की मात्रा 50 टन तक पहुंच गई। यह 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

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एक साल में 1,500% से ज्यादा बढ़ा अवैध सोने का आयात

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कंसल्टेंसी फर्म मेटल्स फोकस के आंकड़ों के हवाले से बताया कि जुलाई से सितंबर के बीच भारत में अनौपचारिक रास्तों से करीब 50 मीट्रिक टन सोना आया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा सिर्फ 3 टन था। यानी एक साल में इसमें 1,500% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि अवैध तरीके से आने वाले सोने की मात्रा का पता कैसे लगाया गया। आमतौर पर इस तरह का सोना तस्करी या लोगों के जरिए छोटी मात्रा में देश में लाया जाता है, जिससे सरकारी टैक्स से बचा जा सके।

इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से बढ़ी तस्करी

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी दोगुने से ज्यादा बढ़ाकर 15% कर दी थी। इसके बाद अनौपचारिक बाजार में सोने का कारोबार तेजी से बढ़ा।

सरकार ने यह फैसला सोने की खरीद कम करने और बढ़ते व्यापार घाटे को नियंत्रित करने के लिए लिया था। ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण भारत का व्यापार घाटा बढ़ रहा है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का कहना है कि पहले भी जब सोने पर टैक्स बढ़ाया गया, तो अवैध रास्तों से सोना लाने का फायदा बढ़ गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर

बिना बिल के सोना खरीदने का चलन बढ़ा

भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहां शादी, त्योहार और बच्चों के जन्म जैसे मौकों पर सोना खरीदने की परंपरा है। लोग इसे गहनों, उपहार और बचत के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

देश में सोने का उत्पादन बेहद कम है, इसलिए ज्यादातर जरूरत आयात से पूरी होती है। इससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव पड़ता है।

ऊंचे टैक्स के कारण अब कई परिवार नकद भुगतान करके बिना बिल के सोना और गहने खरीद रहे हैं। ऐसे लेनदेन का रिकॉर्ड सरकारी अधिकारियों के लिए पता लगाना मुश्किल होता है।

दिवाली से पहले सोने की मांग पर सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली तिमाही के मुकाबले सोने की मांग बढ़ी है, लेकिन सालाना आधार पर ज्यादातर आंकड़े गिरावट दिखाते हैं।

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आमतौर पर साल की आखिरी तिमाही में दिवाली जैसे त्योहारों के कारण खरीदारी बढ़ती है। हालांकि, इस बार मांग उम्मीद से कमजोर रह सकती है।

देश की सबसे बड़ी कीमती धातु रिफाइनरी के मुताबिक, ज्वेलर्स फिलहाल खरीदारी रोक रहे हैं क्योंकि उन्हें कीमतों में और गिरावट की उम्मीद है। अक्टूबर में सोना 6.8% गिरकर 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया और उसके बाद भी इसी स्तर के नीचे कारोबार करता रहा।