
भारत के सिर्फ 36% अमीर परिवारों के पास संपत्ति और कारोबार सौंपने का पक्का प्लान, नई रिपोर्ट में खुलासा
भारत के अमीर परिवारों के सामने अपनी दौलत और कारोबार अगली पीढ़ी को सौंपने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि कई परिवारों के पास इसके लिए कोई लिखित प्लान नहीं है। आखिर इसकी वजह क्या है और अगली पीढ़ी कितनी तैयार है?

In Short
- भारत के सिर्फ 36% अमीर परिवारों के पास संपत्ति और कारोबार अगली पीढ़ी को सौंपने का लिखित प्लान है।
- 42% परिवारों में उत्तराधिकार को लेकर सहमति है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक दस्तावेज तैयार नहीं हुआ है।
- तीसरी पीढ़ी के 54% परिवारों में अगली पीढ़ी कारोबार से जुड़े अहम फैसलों में भागीदारी निभा रही है।
भारत के अमीर परिवारों के सामने अब सिर्फ दौलत कमाने की नहीं, बल्कि उसे अगली पीढ़ी तक सही तरीके से पहुंचाने की भी चुनौती है। Grant Thornton Bharat और Entrust Family Office की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सिर्फ 36% अमीर परिवारों के पास ही कारोबार और संपत्ति की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को सौंपने का लिखित प्लान है। वहीं, 42% परिवारों में इस बात पर मोटे तौर पर सहमति तो है, लेकिन कोई औपचारिक दस्तावेज तैयार नहीं किया गया है।
अगली पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने में कहां है परेशानी?
रिपोर्ट 'Custodians of Change: Next Generation of Indian Wealth' के मुताबिक, परिवार के सदस्यों के बीच सहमति होने का मतलब यह नहीं है कि जिम्मेदारियां भी साफ हैं।
बिना लिखित प्लान के यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि कारोबार की कमान किसके हाथ में होगी, किस सदस्य की क्या जिम्मेदारी होगी और बड़े फैसले कौन लेगा। खासकर जब कारोबार और संपत्ति का नियंत्रण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के पास जाता है, तो आपसी मतभेद की आशंका बनी रहती है।
कारोबार चलाने के तरीके में आ रहा बदलाव
रिपोर्ट बताती है कि अमीर परिवार अब कारोबार के फैसलों के लिए प्रोफेशनल सलाहकारों, कमेटियों और तय नियमों की मदद लेने लगे हैं। कई परिवारों में सदस्य और प्रोफेशनल मैनेजमेंट मिलकर फैसले लेते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में अंतिम फैसला अब भी परिवार के मुखिया का होता है।
पहली पीढ़ी के कारोबारी परिवार का नियंत्रण अपने पास रखना पसंद करते हैं। दूसरी पीढ़ी प्रोफेशनल मैनेजमेंट को ज्यादा महत्व देती है, जबकि तीसरी पीढ़ी परिवार और प्रोफेशनल्स की साझा भागीदारी को बेहतर मानती है।

अगली पीढ़ी को कितनी मिल रही फैसले लेने की आजादी?
रिपोर्ट के मुताबिक, पहली पीढ़ी के 36% परिवारों में अगली पीढ़ी बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है या कारोबार के कुछ हिस्सों की जिम्मेदारी संभालती है।
दूसरी पीढ़ी के परिवारों में यह आंकड़ा घटकर 18% रह जाता है, जबकि तीसरी पीढ़ी में बढ़कर 54% पहुंच जाता है।
वहीं, अगली पीढ़ी की फैसलों में कोई भागीदारी नहीं होने वाले परिवारों का हिस्सा पहली पीढ़ी में 18%, दूसरी में 36% और तीसरी में सिर्फ 8% है।
दौलत बचाने और आगे बढ़ाने पर बढ़ा फोकस
रिपोर्ट में 54% लोगों ने माना कि संपत्ति का उत्तराधिकार अब सिर्फ विरासत मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए लगातार प्लानिंग की जा रही है। वहीं, 68% लोगों का मानना है कि आज संपत्ति संभालने वाले लोग पिछली पीढ़ियों के मुकाबले पारिवारिक दौलत को ज्यादा व्यापक नजरिए से देखते हैं।
Entrust Family Office की को-फाउंडर और सीईओ श्रीप्रिया एनएस के मुताबिक, भारत के सामने अब चुनौती सिर्फ दौलत बनाने की नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित रखने, सही उद्देश्य देने और जिम्मेदारी से अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की है।
यह रिपोर्ट करीब ₹100 करोड़ से ₹10,000 करोड़ तक की संपत्ति वाले कारोबारी परिवारों के सदस्यों और संपत्ति संभालने वाले लोगों से बातचीत और इंटरव्यू के आधार पर तैयार की गई है।

