
सोना सस्ता होते ही केंद्रीय बैंकों ने की ताबड़तोड़ खरीदारी, 3 महीने में खरीदा 321 टन सोना
दुनियाभर में सोने की कीमतों में गिरावट के बावजूद केंद्रीय बैंक लगातार अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की नई रिपोर्ट में खरीदारी के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आखिर सोना सस्ता होने पर कौन से देश सबसे ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं और इसकी वजह क्या है?

In Short
- जुलाई से सितंबर 2026 के बीच केंद्रीय बैंकों ने 321 टन सोना खरीदा, जो 2024 के आखिर के बाद सबसे तेज तिमाही खरीदारी है।
- ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में करीब 25% की गिरावट आई है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बढ़ी है।
- चीन ने 63 टन और पोलैंड ने 41 टन सोना खरीदा, जबकि रूस ने तीसरी तिमाही में 19 टन सोना बेचा।
दुनियाभर में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है, लेकिन केंद्रीय बैंक लगातार अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच केंद्रीय बैंकों ने 321 टन सोना खरीदा। यह 2024 के आखिर के बाद सबसे तेज तिमाही खरीदारी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी धीमी रही थी। हालांकि, सितंबर तक कुल खरीदारी 675 टन पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि से थोड़ी ज्यादा है।
सोने की कीमतें गिरने पर बैंकों ने बढ़ाई खरीदारी
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। इसका असर सोने पर भी पड़ा है। फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमत करीब 25% गिर चुकी है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सीनियर मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट जॉन रीड के मुताबिक, तीसरी तिमाही में सोना सस्ता होने से कई केंद्रीय बैंकों ने खरीदारी बढ़ाई होगी।
उन्होंने बताया कि जिन केंद्रीय बैंकों को लंबी अवधि में अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने की उम्मीद है, वे अपने डॉलर रिजर्व का कुछ हिस्सा सोने में लगा सकते हैं।
चीन और पोलैंड ने खरीदा सबसे ज्यादा सोना
रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी तिमाही में चीन और पोलैंड सोने के सबसे बड़े घोषित खरीदार रहे। चीन ने अपने रिजर्व में 63 टन और पोलैंड ने 41 टन सोना जोड़ा।
वहीं, रूस सोना बेचने वाला एकमात्र प्रमुख देश रहा। उसने इस दौरान 19 टन सोना बेचा।
दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय बैंकों की अनुमानित खरीदारी का करीब दो-तिहाई हिस्सा आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया गया। WGC के लिए मेटल्स फोकस सार्वजनिक आंकड़ों, व्यापार से जुड़े डेटा और रिसर्च के आधार पर इसका अनुमान तैयार करती है।

गोल्ड ETF में बढ़ा निवेश, गहनों की मांग घटी
सोने की कीमतों में कमजोरी के बावजूद गोल्ड ETF में निवेश मजबूत रहा। तीसरी तिमाही में गोल्ड ETF की होल्डिंग 211 टन बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
दूसरी तरफ, सोने के गहनों की मांग 17% गिरकर 313 टन रह गई। WGC के साल 2000 से उपलब्ध आंकड़ों में यह तीसरी तिमाही की सबसे कमजोर मांग है।
भारत और चीन में टैक्स से जुड़े बदलावों और ऊंची कीमतों के कारण ग्राहक हल्के और कम कैरेट वाले गहनों की तरफ बढ़ रहे हैं।
सोने का उत्पादन बढ़ा, सिक्कों और बार की मांग घटी
रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी तिमाही में खदानों से सोने का उत्पादन सालाना आधार पर 3% बढ़कर रिकॉर्ड 1,071 टन पहुंच गया।
वहीं, पुराने सोने की रिसाइक्लिंग 8% घटकर 314 टन रह गई, जो 2023 के बाद सबसे कम है।
सोने के बार और सिक्कों की वैश्विक मांग 19% घटकर 268 टन रही। हालांकि, चीन में इनकी खरीदारी 7% बढ़कर 79 टन पहुंच गई। इसके साथ ही 2026 के पहले नौ महीनों में चीन में बार और सिक्कों की खरीदारी रिकॉर्ड 393 टन हो गई।
