scorecardresearch

बाइक चालान को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, कोर्ट और वारंट तक पहुंच सकता है मामला

बाइक का चालान कटने के बाद उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कई लोग कम रकम समझकर या ज्यादा जुर्माना होने की वजह से चालान नहीं भरते, लेकिन मामला धीरे-धीरे वर्चुअल कोर्ट और फिर नियमित कोर्ट तक पहुंच सकता है। समय पर ऑनलाइन भुगतान या लोक अदालत के जरिए चालान निपटाना परेशानी से बचने का आसान तरीका हो सकता है।

Advertisement
पेंडिंग चालान का अंजाम क्या होगा?
पेंडिंग चालान का अंजाम क्या होगा?

In Short

  • चालान समय पर नहीं भरा तो मामला वर्चुअल कोर्ट तक जा सकता है।
  • कोर्ट के बाद समन और वारंट की स्थिति बन सकती है।
  • ज्यादा चालान होने पर लोक अदालत से राहत मिल सकती है।

अगर आपकी बाइक का चालान कट गया है और आप उसे बार-बार नजरअंदाज कर रहे हैं, तो यह लापरवाही आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकती है। कई लोग चालान की रकम ज्यादा होने या छोटी रकम समझकर उसे भरना टाल देते हैं, लेकिन चालान का मामला धीरे-धीरे कोर्ट तक पहुंच सकता है।

advertisement

चालान से कोर्ट तक कैसे पहुंचता है मामला?

बाइक का चालान कटने के बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर इसका मैसेज भेजा जाता है। अगर आप समय पर चालान का भुगतान नहीं करते हैं, तो करीब 50 से 60 दिनों के बाद यह मामला वर्चुअल कोर्ट में ट्रांसफर हो सकता है।

वर्चुअल कोर्ट में जाने के बाद भी आप घर बैठे ऑनलाइन चालान जमा कर सकते हैं और मामला खत्म हो सकता है। लेकिन अगर यहां भी चालान का भुगतान नहीं किया जाता है, तो यह आगे रेगुलर कोर्ट में भेजा जा सकता है।

इसके बाद चालान निपटाने के लिए आपको कोर्ट जाना पड़ सकता है। कोर्ट की प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जिसे जमा करना जरूरी होगा।

चालान को लगातार इग्नोर करने पर हो सकती है बड़ी परेशानी

अगर कोई व्यक्ति कोर्ट के नोटिस के बाद भी पेश नहीं होता है, तो कोर्ट उसे समन जारी कर सकती है। इसके बाद भी अगर वह कोर्ट में नहीं पहुंचता है, तो उसके खिलाफ वारंट जारी किया जा सकता है और कोर्ट में उपस्थित होना जरूरी हो सकता है।

अगर चालान किसी गंभीर ट्रैफिक अपराध से जुड़ा है, तो कुछ मामलों में कोर्ट गैर-जमानती वारंट भी जारी कर सकती है।

इसलिए चालान आने के बाद उसे लंबे समय तक लंबित रखना सही नहीं है। अगर चालान की रकम बहुत ज्यादा लग रही है और भुगतान करना मुश्किल है, तो लोक अदालत जैसे विकल्पों के जरिए कम राशि में चालान निपटाने का मौका मिल सकता है।

कई चालान जमा होने के बाद उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते क्लियर करना बेहतर है, ताकि भविष्य में कानूनी परेशानी से बचा जा सके।