
कुछ हफ्तों में कैसे सूखे की चपेट में आया महाराष्ट्र? आधे से ज्यादा राज्य में गंभीर सूखे के हालात
मानसून खत्म होने से पहले महाराष्ट्र में सूखे के हालात तेजी से बढ़ गए हैं। कुछ ही हफ्तों में कई जिलों में स्थिति गंभीर हो गई। बारिश, मिट्टी की नमी और जलस्तर से जुड़े आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं और सरकार अब क्या कदम उठाने जा रही है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

In Short
- महाराष्ट्र के आधे से ज्यादा हिस्से में गंभीर सूखे जैसे हालात, कई जिलों में स्थिति बेहद खराब
- तीन हफ्तों में तेजी से बढ़ा सूखे का दायरा, आंकड़ों में दिखा बड़ा बदलाव
- सरकार जल्द जारी कर सकती है पहली सूखा अधिसूचना, राहत उपायों पर बनी नजर
महाराष्ट्र में इस साल मानसून खत्म होने के समय भी जमीन सूखी है। राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से में गंभीर सूखे जैसे हालात बन गए हैं। इंडिया ड्रॉट मॉनिटर के मुताबिक, 16 सितंबर तक महाराष्ट्र का 56.5 फीसदी हिस्सा गंभीर सूखे या उससे ज्यादा खराब स्थिति में था। यह आंकड़ा सितंबर 2021 के बाद सबसे ज्यादा है।
अकोला, सोलापुर, वर्धा और वाशिम में मॉनिटर की हर रीडिंग गंभीर सूखे या उससे भी खराब स्थिति दिखा रही है। राज्य में पहली सूखा अधिसूचना शनिवार तक जारी हो सकती है।
अगस्त से शुरू हुई सूखे की स्थिति
महाराष्ट्र में सूखे की शुरुआत दक्षिणी हिस्सों से हुई। अगस्त के मध्य में सांगली के ज्यादातर इलाके गंभीर सूखे की चपेट में आ गए। इसके बाद सातारा में भी हालात बिगड़ने लगे।
अगस्त के आखिरी सप्ताह तक सोलापुर के साथ-साथ पूर्वी महाराष्ट्र के अकोला, वर्धा और नागपुर में भी सूखे का असर तेजी से बढ़ गया। सितंबर के मध्य तक वाशिम और बीड के किसानों ने राज्य से सूखा घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
तीन हफ्तों में तेजी से बदले हालात
इंडिया ड्रॉट मॉनिटर के आंकड़ों के अनुसार, 19 अगस्त वाले सप्ताह में महाराष्ट्र के करीब 14 फीसदी हिस्से में गंभीर सूखे या उससे खराब स्थिति थी। लेकिन 9 सितंबर वाले सप्ताह तक यह बढ़कर 61.5 फीसदी हो गई।
इसका मतलब है कि सिर्फ तीन हफ्तों में गंभीर सूखे से प्रभावित जमीन चार गुना से ज्यादा बढ़ गई। 16 सितंबर तक इसमें थोड़ी कमी जरूर आई, लेकिन हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।

2023 के मुकाबले इस बार ज्यादा खराब स्थिति
मध्य सितंबर 2023 में महाराष्ट्र का 52.7 फीसदी हिस्सा असामान्य रूप से सूखा या सूखे की स्थिति में था। लेकिन गंभीर सूखे वाले इलाकों का हिस्सा सिर्फ 7 फीसदी था।
इस साल गंभीर सूखे या उससे खराब स्थिति वाला क्षेत्र करीब आठ गुना ज्यादा है। इस बार नागपुर डिवीजन में भी स्थिति खराब है, जहां 63.2 फीसदी जमीन गंभीर सूखे की स्थिति में है।
बीड और धाराशिव में भी हालात चिंताजनक
राज्य के 33 बड़े जिलों में से 19 जिलों में कम से कम आधा हिस्सा गंभीर सूखे या उससे ज्यादा खराब स्थिति में है।
बीड में 92.9 फीसदी और धाराशिव में 90.9 फीसदी जमीन गंभीर सूखे की स्थिति में है। डिवीजन के हिसाब से अमरावती सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 84.8 फीसदी क्षेत्र गंभीर सूखे या उससे खराब स्थिति में है। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन 65.9 फीसदी और नागपुर 63.2 फीसदी के साथ प्रभावित हैं।
बारिश में भी दिखी कमी
भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 22 सितंबर तक महाराष्ट्र में 787.2 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य 953.2 मिलीमीटर बारिश से 17 फीसदी कम है।
मराठवाड़ा में बारिश की कमी 37 फीसदी और विदर्भ में 28 फीसदी रही। बीड में बारिश 48 फीसदी, धाराशिव में 45 फीसदी और अकोला में 40 फीसदी कम दर्ज की गई।
हालांकि, पुणे और नासिक में बारिश सामान्य से ज्यादा रही। पुणे में 18 फीसदी और नासिक में 40 फीसदी ज्यादा बारिश हुई।
सरकार तैयार कर रही राहत योजना
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य सरकार तीन दिन में पहली अधिसूचना जारी करेगी। उन्होंने कहा कि सूखा घोषित करने के साथ-साथ उससे जुड़े कदमों को लागू करना भी जरूरी है।
सरकार बारिश, पानी की उपलब्धता और फसलों की स्थिति के आधार पर प्रभावित इलाकों की पहचान कर रही है। किसानों को मदद देने की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही गई है।
राहत के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में कैबिनेट सब कमेटी बनाई गई है। किसान संगठनों ने भी राहत राशि की मांग की है। अब सबकी नजर शनिवार को जारी होने वाली पहली सूखा अधिसूचना पर है।

