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बाइक चलाते समय छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी, सुरक्षित राइडिंग के लिए अपनाएं ये नियम

भारत में बाइक चलाना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अचानक लेन बदलते वाहन, गलत दिशा से आने वाले लोग और लापरवाही भरी ड्राइविंग हादसों का कारण बन सकती है। ऐसे में सही हेलमेट, राइडिंग गियर, डिफेंसिव राइडिंग और बाइक की नियमित देखभाल से खतरे को कम किया जा सकता है और सफर को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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सही गियर पहनने से लेकर डिफेंसिव राइडिंग तक, ये आदतें आपको अचानक हादसों से बचाने में मदद कर सकती हैं। (फोटो: AI से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर)
सही गियर पहनने से लेकर डिफेंसिव राइडिंग तक, ये आदतें आपको अचानक हादसों से बचाने में मदद कर सकती हैं। (फोटो: AI से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर)

In Short

  • हेलमेट और सही राइडिंग गियर दुर्घटना के दौरान गंभीर चोटों का खतरा कम कर सकते हैं।
  • डिफेंसिव राइडिंग अपनाकर अचानक आने वाली ट्रैफिक स्थितियों से बचने का मौका मिलता है।
  • ABS जैसे सेफ्टी फीचर्स मददगार हैं, लेकिन सावधानी और सही राइडिंग जरूरी है।

भारत की सड़कों पर बाइक चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है। यहां अचानक गलत दिशा से आने वाले वाहन, बिना इंडिकेटर के लेन बदलना, तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग जैसी स्थितियां कभी भी खतरा पैदा कर सकती हैं। कई बार राइडर की गलती न होने के बावजूद हादसे हो जाते हैं। ऐसे में सुरक्षित राइडिंग के लिए सावधानी और सही आदतें बेहद जरूरी हैं।

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कारों की तरह बाइक में एयरबैग, मजबूत केबिन या क्रैश प्रोटेक्शन स्ट्रक्चर नहीं होता। कार में सीट बेल्ट, क्रंपल जोन और कई सेफ्टी फीचर्स यात्रियों को सुरक्षा देते हैं, लेकिन बाइक पर राइडर सीधे सड़क और ट्रैफिक के संपर्क में होता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाइक चलाते समय सुरक्षा के विकल्प कम हैं। सही गियर और समझदारी से राइडिंग करके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हर राइड पर पहनें सही सेफ्टी गियर

बाइक राइडिंग में सबसे जरूरी चीजों में से एक है सही सुरक्षा गियर पहनना। हेलमेट केवल लंबे सफर के लिए नहीं, बल्कि छोटी दूरी की राइड में भी जरूरी है। हेलमेट सही फिटिंग वाला होना चाहिए और उसे हमेशा ठीक से लॉक करके पहनना चाहिए।

राइडिंग जैकेट, ग्लव्स, राइडिंग पैंट और अच्छे जूते भी चोट से बचाने में मदद कर सकते हैं। दुर्घटना के समय हाथ, घुटने, कंधे और पीठ पर चोट लगने का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए प्रोटेक्टिव गियर काफी अहम भूमिका निभाता है।

डिफेंसिव राइडिंग अपनाएं

सुरक्षित राइडिंग का मतलब सिर्फ बाइक को तेज चलाना नहीं, बल्कि सड़क पर मौजूद दूसरे लोगों की गलतियों को पहले से समझना भी है।

राइडर को हमेशा अपने आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी चाहिए। किसी बड़े वाहन के ब्लाइंड स्पॉट में ज्यादा देर तक चलने से बचना चाहिए। चौराहों, कट और ट्रैफिक वाले इलाकों में यह मानकर चलना बेहतर है कि कोई वाहन अचानक सामने आ सकता है।

सड़क पर केवल अपने सामने वाले वाहन को देखने के बजाय आगे के ट्रैफिक पर नजर रखना जरूरी है। इससे अचानक ब्रेक लगाने या लेन बदलने जैसी स्थिति में प्रतिक्रिया देने का समय मिल सकता है।

स्पीड को हालात के हिसाब से रखें

बाइक हादसों में केवल तेज रफ्तार ही कारण नहीं होती, बल्कि अचानक आने वाली स्थिति में प्रतिक्रिया देने के लिए समय और दूरी की कमी भी बड़ा कारण बनती है।

एक जानी-पहचानी सड़क पर भी जरूरत से ज्यादा भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर बार ट्रैफिक की स्थिति अलग हो सकती है। मौसम, सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और आसपास मौजूद पैदल यात्रियों को ध्यान में रखकर स्पीड तय करनी चाहिए।

खुद को सड़क पर दिखाना भी जरूरी

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बाइक राइडर के लिए सड़क पर दिखाई देना भी सुरक्षा का अहम हिस्सा है। लेन बदलते समय इंडिकेटर का इस्तेमाल करें और अचानक मूवमेंट्स करने से बचें।

रात या कम रोशनी में बाइक की लाइट्स सही हालत में होनी चाहिए। रिफ्लेक्टिव जैकेट या गियर भी दूसरे वाहन चालकों को राइडर को पहचानने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, केवल हॉर्न या इंडिकेटर के भरोसे नहीं रहना चाहिए। किसी भी दिशा में जाने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सामने वाला वाहन आपको देख रहा है।

बाइक के सेफ्टी फीचर्स को समझें

आजकल कई बाइक में ABS, ट्रैक्शन कंट्रोल और राइडिंग मोड जैसे फीचर्स मिलते हैं। ये सिस्टम सुरक्षा बढ़ाते हैं, लेकिन राइडर की सावधानी की जगह नहीं ले सकते।

ABS अचानक ब्रेक लगाने पर व्हील लॉक होने से बचा सकता है, लेकिन यह बाइक को हर स्थिति में तुरंत रोक नहीं सकता। इसके अलावा टायर प्रेशर, ब्रेक, लाइट, मिरर और चेन की नियमित जांच भी जरूरी है।

राइडिंग के दौरान ध्यान भटकाने वाली चीजों से बचें

बाइक चलाते समय पूरा ध्यान सड़क पर होना चाहिए। मोबाइल फोन का इस्तेमाल या ऐसी कोई भी चीज जो ध्यान भटकाए, दुर्घटना का खतरा बढ़ा सकती है।

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नेविगेशन या कॉल जैसी चीजों को राइड शुरू करने से पहले सेट कर लेना चाहिए। अगर फोन इस्तेमाल करना जरूरी हो तो बाइक रोककर सुरक्षित जगह पर ही करें।

सड़क पर हर खतरे को नियंत्रित करना संभव नहीं है, लेकिन अपनी स्पीड, ध्यान, बाइक की स्थिति और सुरक्षा गियर को नियंत्रित किया जा सकता है। सुरक्षित राइडिंग की शुरुआत इंजन स्टार्ट करने से पहले ही हो जाती है।