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Delhi-NCR के बाद और शहरों में ICE वाहनों पर लगेगी पाबंदी? PM के सलाहकार तरुण कपूर ने दिए बड़े संकेत

प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में ICE वाहनों पर और सख्त पाबंदियां लग सकती हैं। सरकार EV ट्रांजिशन को तेज करना चाहती है और अगले पांच साल में ऑटो सेक्टर में बड़े बदलाव के साथ इलेक्ट्रिक ट्रकों बैटरी और चार्जिंग पर जोर देगी।

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AI Generated Image

In Short

  • प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने कहा कि दिल्ली-NCR के बाद दूसरे इलाकों में भी ICE वाहनों पर पाबंदियां बढ़ सकती हैं।
  • तरुण कपूर ने इलेक्ट्रिक ट्रकों को EV ट्रांजिशन की सबसे बड़ी चुनौतियों में बताया और बड़े पैमाने पर इनकी संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।
  • सरकार बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंसिंग और बैटरी स्वैपिंग के जरिए EV लागत घटाने पर काम कर रही है।

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेज करने के लिए सरकार आने वाले वर्षों में बड़े नीतिगत बदलाव कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार तरुण कपूर ने कहा है कि अगले पांच वर्षों में सरकार सिर्फ छोटे बदलाव नहीं बल्कि ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव देखना चाहती है। उन्होंने संकेत दिया कि पारंपरिक पेट्रोल-डीजल यानी ICE वाहनों पर और सख्त पाबंदियां लग सकती हैं।

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नई दिल्ली में 66वें SIAM Annual Convention में बोलते हुए तरुण कपूर ने कहा कि इंडस्ट्री को आने वाले बड़े कदमों के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने ऑटो कंपनियों से भी कहा कि वे EV ट्रांजिशन को तेज करने के लिए नए सुझाव लेकर आएं।

ICE वाहनों पर बढ़ सकती हैं पाबंदियां

तरुण कपूर ने कहा कि दिल्ली-NCR में पारंपरिक वाहनों पर कुछ प्रतिबंध पहले ही शुरू हो चुके हैं। आगे दूसरे इलाकों में भी ऐसी पाबंदियां लागू हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि NCR में जो बदलाव दिखाई दे रहे हैं, वही मॉडल आगे दूसरे क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बड़ा बाजार तैयार हो सकता है।

ट्रक सबसे बड़ी चुनौती

कपूर ने भारी वाहनों, खासकर ट्रकों को EV ट्रांजिशन की सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए डीजल की खपत कम करना जरूरी है, क्योंकि अगर पेट्रोल की मांग बदल भी जाए लेकिन डीजल की खपत ऊंची बनी रही तो यह बड़ी समस्या बनी रहेगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

उन्होंने CNG से आगे बढ़कर इलेक्ट्रिक ट्रकों पर जोर देने की बात कही। कपूर ने कहा कि केवल 200 या 500 इलेक्ट्रिक ट्रक पर्याप्त नहीं होंगे। इस संख्या को पहले 10 गुना और फिर उसके बाद फिर 10 गुना बढ़ाने की जरूरत है।

माइनिंग और कोल सेक्टर की भूमिका

तरुण कपूर ने कहा कि बड़े फ्लीट यूजर जैसे माइनिंग और कोल सेक्टर इलेक्ट्रिक ट्रकों को तेजी से अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों की मांग तैयार हो सकती है।

बैटरी और चार्जिंग पर भी फोकस

कपूर ने कहा कि घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ने के साथ सरकार आयातित बैटरियों से जुड़े टैक्स और दूसरे उपायों पर भी विचार कर रही है। इसका मकसद भारत में ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग और वैल्यू एडिशन सुनिश्चित करना है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को उन्होंने एक और बड़ी चुनौती बताया। तेल कंपनियों ने देशभर में चार्जिंग पॉइंट लगाए हैं, लेकिन कम इस्तेमाल और खराब मेंटेनेंस के कारण इनमें से कई काम नहीं कर रहे हैं।

EV की लागत घटाने पर काम

सरकार EV की कीमत कम करने के लिए फाइनेंसिंग मॉडल, बैटरी स्वैपिंग और हाईवे पर ज्यादा चार्जिंग सुविधा जैसे विकल्पों पर भी काम कर रही है।

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तरुण कपूर ने कहा कि यह बदलाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा है, क्योंकि देश कच्चे तेल और LNG के आयात पर काफी निर्भर है। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में सरकार इंडस्ट्री के साथ मिलकर ऑटो सेक्टर का पूरा परिदृश्य बदलना चाहती है और भारत को बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब बनाना चाहती है।