
EV खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, सरकार जल्द खत्म कर सकती है सब्सिडी और सपोर्ट- जानिए पूरी डिटेल
भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कमरान रिजवी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सरकारी सब्सिडी और समर्थन हमेशा जारी नहीं रहेगा। EV इंडस्ट्री को अपने दम पर आगे बढ़ने के लिए तैयार होना होगा। देश में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की हिस्सेदारी पहले ही करीब 50 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

In Short
- भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कमरान रिजवी ने कहा कि EV सेक्टर को सरकारी सब्सिडी खत्म होने के बाद अपने दम पर आगे बढ़ने के लिए तैयार रहना होगा।
- उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी पहुंच चुकी है और अगले दो-तीन साल में 75 फीसदी हो सकती है।
- रिजवी के मुताबिक अगले पांच साल में भारी श्रेणी के वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक ट्रकों की हिस्सेदारी कम से कम 25 फीसदी तक पहुंच सकती है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई योजनाओं और सब्सिडी के जरिए उद्योग को सहारा दिया है। लेकिन अब सरकार का संकेत साफ है कि यह समर्थन हमेशा जारी नहीं रहेगा। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर को धीरे-धीरे ऐसी स्थिति में पहुंचना होगा जहां वह सरकारी मदद के बिना भी अपने दम पर आगे बढ़ सके।
नई दिल्ली में 66वें SIAM Annual Convention में बोलते हुए भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कमरान रिजवी ने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सरकारी सब्सिडी और समर्थन का खत्म होना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ सेगमेंट में यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
सब्सिडी हमेशा नहीं रहेगी
कमरान रिजवी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि सरकार की तरफ से मिलने वाला समर्थन धीरे-धीरे खत्म होगा। उनके मुताबिक इंडस्ट्री को अब अपनी लागत, मांग और कारोबारी मॉडल के आधार पर खुद को टिकाऊ बनाना होगा।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत का EV ट्रांजिशन अब काफी आगे बढ़ चुका है और खास तौर पर इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट में तेजी साफ दिख रही है।
थ्री-व्हीलर में EV की हिस्सेदारी 50 फीसदी
रिजवी के मुताबिक देश में बिकने वाले सभी थ्री-व्हीलर्स में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी तक पहुंच चुकी है। सरकार ने पहले 2026 तक 10 फीसदी हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन वर्षों में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की हिस्सेदारी 75 फीसदी तक पहुंच सकती है।

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 7 फीसदी है, जबकि इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी लगभग 4 से 5 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
इलेक्ट्रिक बसों की मांग भी मजबूत
रिजवी ने कहा कि इलेक्ट्रिक बस सेगमेंट में मांग इतनी मजबूत है कि कई निर्माताओं के पास सप्लाई से ज्यादा ऑर्डर हैं। भारत में करीब 1.5 लाख सार्वजनिक परिवहन बसों को इलेक्ट्रिक बनाने की जरूरत है। इसके अलावा करीब 20 लाख निजी बसें भी हैं, जिनमें से कम से कम आधी को इलेक्ट्रिक करना होगा।
उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन वर्षों में Payment Security Mechanism के तहत 160 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रिक ट्रक अगला बड़ा मौका
कमरान रिजवी ने इलेक्ट्रिक ट्रकों को उद्योग के लिए अगला बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि FAME-II योजना के तहत केवल करीब 100 इलेक्ट्रिक ट्रकों को समर्थन मिला था, लेकिन अब इनकी अर्थव्यवस्था बेहतर हो रही है।
उनके मुताबिक अगले पांच वर्षों में भारी श्रेणी के वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक ट्रकों की हिस्सेदारी कम से कम 25 फीसदी तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि 55 टन कैटेगरी में इलेक्ट्रिक ट्रक पहले ही डीजल ट्रकों के मुकाबले ज्यादा फायदे वाले हो चुके हैं।
अब अपने दम पर बढ़ना होगा EV सेक्टर
रिजवी ने कहा कि भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा FAME-I, FAME-II, Production Linked Incentive योजना, Advanced Chemistry Cell Manufacturing और दूसरी सरकारी पहलों के जरिए आगे बढ़ी है।
अब असली चुनौती यह है कि सरकारी समर्थन कम होने के बाद भी EV सेक्टर अपनी रफ्तार बनाए रखे और इलेक्ट्रिक वाहन व्यावसायिक रूप से खुद टिकाऊ बन सकें।
