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गाड़ियों के लिए जल्द आएंगे नए BS-VII नियम, सरकार ने दिया बड़ा संकेत, अगले कुछ महीनों में जारी होगा ड्राफ्ट

भारत में गाड़ियों के लिए नए और ज्यादा सख्त emission norms की तैयारी तेज हो गई है। BS-VII को लेकर सरकार की consultations अंतिम चरण में हैं और जल्द बड़ा अपडेट सामने आ सकता है। नए नियम कब आएंगे, इंडस्ट्री के सामने क्या चुनौती होगी और सरकार किन मुद्दों पर फोकस कर रही है, जानिए पूरी खबर।

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BS-VII Emission Norms
BS-VII Emission Norms

In Short

  • BS-VII emission norms का ड्राफ्ट अगले दो महीनों में आने की उम्मीद
  • नई emission व्यवस्था में implementation timeline बन सकती है बड़ी चुनौती
  • Vehicle recycling EPR और logistics efficiency पर भी सरकार का फोकस

भारत में गाड़ियों के लिए अगले दौर के सख्त उत्सर्जन नियमों की तैयारी तेज हो गई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने कहा है कि BS-VII Emission Norms को लेकर सरकार की बातचीत अब अंतिम चरण में है और इसका ड्राफ्ट अगले दो महीनों में सामने आ सकता है। नई दिल्ली में आयोजित 66वें SIAM Annual Convention में वी उमाशंकर ने कहा कि BS-VII से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर consultations चल रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि नए नियमों को लागू करने की टाइमलाइन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

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कई पावरट्रेन के बीच बढ़ रही ऑटो कंपनियों की चुनौती

उमाशंकर ने कहा कि ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए काम लगातार जटिल होता जा रहा है। इंडस्ट्री को एक तरफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर काम करना है तो दूसरी तरफ alternative fuels और ज्यादा सख्त emission requirements को भी पूरा करना है।

ऐसे में कंपनियों को एक साथ कई तरह की technologies और powertrains के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है। BS-VII की तरफ बढ़ते समय इस बदलाव को संभालना ऑटो इंडस्ट्री के लिए अहम रहेगा।

एक्सप्रेसवे पर ट्रकों की स्पीड को लेकर सरकार की नजर

वी उमाशंकर ने logistics efficiency का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क और expressway infrastructure पर निवेश के बावजूद भारत में ट्रकों की औसत स्पीड करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे से ऊपर क्यों नहीं बढ़ रही है, सरकार इसकी पड़ताल कर रही है।

उन्होंने कहा कि logistics efficiency सुधारने के लिए trucks का बेहतर power-to-weight ratio महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके साथ ही सरकार यह भी देख रही है कि logistics से जुड़े incentives को किस तरह दोबारा डिजाइन किया जा सकता है। 

Image Credit: AAJ TAK

Vehicle Recycling और EPR पर भी चर्चा

वाहनों की recycling और Extended Producer Responsibility यानी EPR को लेकर भी उमाशंकर ने ऑटो इंडस्ट्री की चिंताओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि producer responsibility से जुड़े विस्तृत नियमों को लेकर इंडस्ट्री की समस्याओं का समाधान जरूरी है।

उनके मुताबिक EPR को सफल बनाने के लिए vehicle scrappage और recycling का पूरा ecosystem आर्थिक रूप से मजबूत होना चाहिए। अगर गाड़ियों की scrapping और recycling के लिए viable ecosystem तैयार नहीं हुआ तो नियमों को लागू करने में मुश्किलें सामने आ सकती हैं।

SIAM पहले भी सरकार के साथ end-of-life vehicles के लिए EPR requirements को आसान और व्यावहारिक बनाने को लेकर काम कर चुका है।

भारतीय ऑटो स्टैंडर्ड की वैश्विक पहचान बढ़ी

उमाशंकर ने भारत के automotive standards की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का भी जिक्र किया। उन्होंने Chile के साथ भारत की हाल की बातचीत का उदाहरण देते हुए कहा कि trade discussions के दौरान भारतीय standards को स्वीकार किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय automotive standards की credibility अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हो रही है।

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