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चीन की सस्ती बैटरियां भारत के लिए फायदा या खतरा? EV की कीमतों से लेकर घरेलू कंपनियों तक जानें पूरा असर

चीन की बैटरी कंपनियां एक बार फिर मोटा मुनाफा कमा रही हैं, जबकि भारत अपनी EV बैटरी इंडस्ट्री को मजबूत बनाने के लिए ₹18,100 करोड़ की योजना पर काम कर रहा है। लेकिन चीन की सस्ती बैटरियां भारतीय कंपनियों के लिए नई मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। क्या इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियां सस्ती होंगी या घरेलू बैटरी फैक्ट्रियों को नुकसान होगा? जानिए पूरा मामला।

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चीन की ताकत सिर्फ बड़े पैमाने पर बैटरी उत्पादन तक सीमित नहीं है।
चीन की ताकत सिर्फ बड़े पैमाने पर बैटरी उत्पादन तक सीमित नहीं है।

In Short

  • चीन की बैटरी इंडस्ट्री का तिमाही मुनाफा 6% बढ़कर 64 अरब युआन पहुंचा।
  • भारत बैटरी उत्पादन बढ़ाने के लिए ₹18,100 करोड़ की PLI योजना चला रहा है।
  • सस्ती चीनी बैटरियां EV की लागत घटा सकती हैं, लेकिन घरेलू कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा।

चीन की बैटरी इंडस्ट्री एक बार फिर तेजी से मुनाफा कमा रही है। इससे भारत के सामने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए बैटरी बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। भारत सरकार देश में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए ₹18,100 करोड़ की योजना चला रही है, लेकिन चीन की कम उत्पादन लागत, आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर बैटरी बनाने की क्षमता भारतीय कंपनियों के लिए मुकाबला मुश्किल बना सकती है।

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Citi के विश्लेषण में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में चीन की बैटरी इंडस्ट्री का ब्याज और टैक्स से पहले मुनाफा (EBIT) करीब 64 अरब युआन पहुंच गया। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 6% ज्यादा है। इसके साथ ही चीनी कंपनियां बैटरी उत्पादन बढ़ाने के लिए नए निवेश भी कर रही हैं।

चीन में बैटरी बनाने वाली कंपनियों की कमाई क्यों बढ़ रही है?

चीन की बैटरी इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब मुनाफे का बड़ा हिस्सा बैटरी बनाने वाली कंपनियों के पास जा रहा है। अनुमान के मुताबिक, BYD को छोड़कर दूसरी बैटरी निर्माता कंपनियों की कुल इंडस्ट्री मुनाफे में हिस्सेदारी करीब 45% तक पहुंच गई है। साल 2022 में लिथियम की कीमतों में तेजी के दौरान सबसे ज्यादा फायदा लिथियम खनन करने वाली कंपनियों को हुआ था।

अब स्थिति बदल रही है। बैटरी बनाने की तकनीक, कच्चे माल की प्रोसेसिंग और कम लागत में ज्यादा उत्पादन करने की क्षमता कंपनियों की कमाई तय कर रही है। चीन की कंपनियों के पास पहले से मजबूत सप्लाई चेन और उत्पादन का लंबा अनुभव है, जिससे उन्हें लागत कम रखने और बाजार की मांग के मुताबिक तेजी से उत्पादन बदलने में मदद मिलती है।

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भारत की ₹18,100 करोड़ की योजना के सामने क्या चुनौती?

भारत सरकार एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹18,100 करोड़ की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना चला रही है। इसका मकसद देश में बैटरी उत्पादन बढ़ाना और विदेशों से आयात होने वाली बैटरियों पर निर्भरता कम करना है। हालांकि, केवल बैटरी फैक्ट्री लगाना ही काफी नहीं होगा।

भारतीय कंपनियों को कच्चे माल की सप्लाई, बेहतर तकनीक, उत्पादन की गुणवत्ता और कम लागत पर भी काम करना होगा। नई बैटरी फैक्ट्रियां लगाने में भारी निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में कंपनियों के लिए जरूरी होगा कि वे अपनी उत्पादन क्षमता का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें, ताकि लागत कम हो और निवेश से मुनाफा कमाया जा सके।

सस्ती चीनी बैटरियां भारत के लिए फायदा या नुकसान?

चीन में बड़े पैमाने पर बनने वाली सस्ती बैटरियां भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। कम कीमत पर बैटरी मिलने से EV बनाने की लागत घट सकती है और ग्राहकों को इलेक्ट्रिक कारें और दोपहिया वाहन सस्ते मिल सकते हैं।

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लेकिन दूसरी तरफ यही सस्ती चीनी बैटरियां भारत की नई बैटरी फैक्ट्रियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। अगर आयातित बैटरियां घरेलू उत्पादन से सस्ती पड़ती हैं, तो भारतीय कंपनियों पर कीमतें कम रखने का दबाव बढ़ेगा। इससे उनका मुनाफा प्रभावित हो सकता है और नई फैक्ट्रियों में किए गए निवेश की भरपाई करना मुश्किल हो सकता है।

क्या भारत चीन से मुकाबला कर पाएगा?

चीन की बैटरी कंपनियां लगातार नए प्लांट और तकनीक में निवेश कर रही हैं। इससे आने वाले समय में उनकी उत्पादन क्षमता और बढ़ सकती है। हालांकि, इसका असर बैटरी की मांग, कीमतों और बाजार में जरूरत से ज्यादा उत्पादन होने की स्थिति पर भी निर्भर करेगा।

भारत के लिए असली चुनौती सिर्फ देश में बैटरी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी कीमत पर तैयार करना है जिससे कंपनियां बिना लगातार सरकारी मदद के भी मुनाफा कमा सकें। सरकार की PLI योजना निवेश बढ़ाने में मदद कर सकती है, लेकिन लंबे समय की सफलता उत्पादन लागत, फैक्ट्रियों की क्षमता के इस्तेमाल और कमाई पर निर्भर करेगी। ऐसे में भारत को अपनी EV बैटरी इंडस्ट्री मजबूत बनाने के लिए निवेश के साथ तकनीक और उत्पादन क्षमता पर भी ध्यान देना होगा।

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