
N NARYANMURTHI: अब ऐसा क्या कह दिया जिस पर छिड़ गई नई बहस?
एन. नारायण मूर्ति ने इस बार स्कूल टीचर्स की कम सैलरी को लेकर बड़ी बात कही है। एक कार्यक्रम के दौरान नारायण मूर्ति ने कहा कि देश में खास तौर पर स्कूल टीचर्स के विकास पर फोकस करना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने टीचर्स और रिसर्चर्स की सैलरी बढ़ाने के लिए भी कहा।

इंफोसिस के को-फाउंडर एन. नारायण मूर्ति ने एक बार फिर नया बयान दिया है। जिसने यकीनन नई बहस को छेड़ दिया है। आपको याद होगा कि कुछ वक्त पहले ही नारायण मूर्ति ने भारतीय युवाओं के एक हफ्ते में 70 घंटे काम करने की बात कही थी। उनके इस बयान ने ना सिर्फ मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरीं थी, बल्कि काफी कॉन्ट्रोवर्सी भी छिड़ गई थी। अब उन्होंने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है, जो आम लोगों के साथ-साथ सरकारों को भी सोचने पर मजबूर कर सकती हैं। आखिर क्या नारायण मूर्ति ने क्या कहा है, आइये जानते हैं?

एन. नारायण मूर्ति ने इस बार स्कूल टीचर्स की कम सैलरी को लेकर बड़ी बात कही है। एक कार्यक्रम के दौरान नारायण मूर्ति ने कहा कि देश में खास तौर पर स्कूल टीचर्स के विकास पर फोकस करना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने टीचर्स और रिसर्चर्स की सैलरी बढ़ाने के लिए भी कहा। नारायण मूर्ति का साफ तौर पर कहना है कि भारत को टीचर्स की ट्रेनिंग के लिए करीब 2500 ‘ट्रेन द टीचर’ कॉलेज खोलने चाहिए। यहां पर दुनिया के 10,000 से ज्यादा बेस्ट रिटायर्ड टीचर्स को बुलाना चाहिए। ताकि साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स में भारत को दुनिया के बराबर खड़ा किया जा सके। उन्होंने इसके लिए हर साल 1 बिलियन डॉलर यानी करीब 8300 करोड़ रुपए खर्च करने की बात कही। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि हम हर साल देश के करीब 2.5 लाख प्राइमरी और 2.5 लाख सेकेंडरी टीचर्स को ट्रेन कर सकते हैं, जो आने वाले समय की चुनौतियों के लिए तैयार होंगे।

इतना ही नहीं नारायण मूर्ति ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हमें अपने टीचर्स के लिए सम्मान दिखाना चाहिए। टीचर्स और रिसर्चर्स को बेहतर सैलरी देनी चाहिए. उन्हें बेहतर फैसिलिटी देनी चाहिए। वो हमारी यंग जेनरेशन के लिए रोल मॉडल हैं। भारत में तरह-तरह के सुझाव आते हैं और मुझे यकीन है कि हमारे पास एक्सपर्ट्स का एक समूह है जो उन सुझावों का एनालिसिस करेगा। यदि यह सार्थक पाया गया तो वे इसे आगे बढ़ा सकते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि इन सभी सुझावों का स्वागत किया जाना चाहिए, जब तक कि ये देश की भलाई की भावना से दिए गए हों।

