
Raksha Bandhan 2026: कृष्ण-द्रौपदी से लेकर इंद्राणी तक, जानें राखी से जुड़ी 4 रोचक कहानियां
रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्यार का त्योहार नहीं, बल्कि इससे जुड़ी कई रोचक पौराणिक कहानियां भी हैं. कृष्ण-द्रौपदी से लेकर राजा बलि और मां लक्ष्मी तक, राखी की परंपरा से जुड़ी ये कथाएं बेहद दिलचस्प हैं. जानिए आखिर किन घटनाओं को रक्षाबंधन की शुरुआत से जोड़ा जाता है और क्या है इनकी पूरी कहानी.

In Short
- रक्षाबंधन से जुड़ी कृष्ण-द्रौपदी की कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है.
- राजा बलि को राखी बांधकर मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को वापस पाया था.
- इंद्राणी के रक्षा सूत्र बांधने के बाद इंद्र युद्ध में विजयी हुए थे.
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और रिश्ते का प्रतीक माना जाता है. इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026 को मनाया जा रहा है. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनसे अपनी रक्षा का वचन लेती हैं. वहीं भाई भी अपनी बहनों को प्यार और सुरक्षा का भरोसा देते हैं. रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और इस दिन राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का खास महत्व होता है.
रक्षाबंधन से जुड़ी कई कहानियां प्रचलित हैं. इनमें कुछ ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं ऐसी हैं, जिन्हें इस त्योहार की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है.
1) कृष्ण और द्रौपदी की कहानी
रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे ज्यादा प्रचलित कहानी भगवान कृष्ण और द्रौपदी की है. महाभारत के समय एक बार कृष्ण की अंगुली में चोट लग गई और खून बहने लगा. यह देखकर द्रौपदी ने अपने आंचल का पल्लू फाड़कर उनकी कटी अंगुली पर बांध दिया.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी घटना से रक्षा सूत्र या राखी बांधने की परंपरा शुरू हुई. बाद में जब महाभारत में द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाकर उनकी रक्षा की.
2) युधिष्ठिर ने सैनिकों को बांधा रक्षा सूत्र
राखी से जुड़ी एक अन्य कहानी महाभारत के युद्ध से जुड़ी है. कहा जाता है कि युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा कि वह सभी दुखों से कैसे पार पा सकते हैं. तब कृष्ण ने उन्हें अपने सभी सैनिकों को रक्षा सूत्र बांधने की सलाह दी.
युधिष्ठिर ने ऐसा ही किया और उन्हें युद्ध में विजय मिली. यह घटना श्रावण माह की पूर्णिमा को हुई थी. इसी वजह से इस दिन रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा को रक्षाबंधन से जोड़ा जाता है.
3) राजा बलि और मां लक्ष्मी की कहानी
राजा बलि भगवान विष्णु के भक्त और बड़े दानी राजा थे. एक बार भगवान विष्णु ने ब्राह्मण का रूप लेकर उनसे तीन पग भूमि मांगी. राजा बलि ने उनकी मांग मान ली. भगवान ने दो पग में पूरी भूमि और आकाश नाप लिया.
राजा बलि समझ गए कि यह भगवान विष्णु की परीक्षा है. उन्होंने तीसरा पग अपने सिर पर रखने को कहा. इसके बाद उन्होंने भगवान से अपने साथ पाताल में रहने का आग्रह किया.
भगवान विष्णु के वापस न लौटने से मां लक्ष्मी चिंतित हो गईं. उन्होंने गरीब महिला का रूप लेकर राजा बलि को राखी बांधी. बदले में बलि ने उनसे कुछ भी मांगने को कहा. तब मां लक्ष्मी ने अपना असली रूप दिखाकर भगवान विष्णु को वापस लौटाने की मांग की. राखी का मान रखते हुए राजा बलि ने भगवान विष्णु को मां लक्ष्मी के साथ वापस भेज दिया.
4) इंद्र और इंद्राणी की राखी
एक मान्यता के अनुसार, दैत्य वृत्रासुर ने स्वर्ग पर चढ़ाई कर इंद्र का सिंहासन हासिल करने की कोशिश की. वृत्रासुर बहुत शक्तिशाली था और उसे हराना आसान नहीं था.
युद्ध में देवराज इंद्र की रक्षा के लिए उनकी बहन इंद्राणी ने अपने तपोबल से एक रक्षा सूत्र तैयार किया और इंद्र की कलाई पर बांध दिया. इसके बाद इंद्र युद्ध में विजयी हुए. तभी से बहनों द्वारा भाइयों की कलाई पर रक्षा के लिए राखी बांधने की परंपरा को इससे भी जोड़ा जाता है.

