Gold ETF और Gold FoF क्या हैं? सोने में निवेश के इन ऑप्शंस से पोर्टफोलियो को मिलेगा फायदा
सोने में निवेश के लिए सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही विकल्प नहीं है। Gold ETF और Gold FoF जैसे म्यूचुअल फंड विकल्पों के जरिए निवेशक गोल्ड मार्केट में भागीदारी कर सकते हैं। ये पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने और अलग-अलग आर्थिक परिस्थितियों में जोखिम को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं।

In Short
- Gold ETF और Gold FoF के जरिए निवेशक बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे सोने में निवेश कर सकते हैं और पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर सकते हैं।
- Gold ETF घरेलू सोने की कीमत को ट्रैक करता है जबकि Gold FoF मुख्य रूप से Gold ETF की यूनिट्स में निवेश करता है।
- गोल्ड म्यूचुअल फंड इक्विटी और डेट से अलग एसेट के तौर पर पोर्टफोलियो जोखिम को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं।
सोने को सिर्फ गहनों या खरीदारी तक सीमित नहीं माना जाता। निवेश के लिहाज से भी कई लोग गोल्ड को अपने पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाते हैं। Gold ETF और Gold Fund of Fund यानी Gold FoF ऐसे विकल्प हैं, जिनके जरिए निवेशक बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे सोने में निवेश कर सकते हैं।
गोल्ड म्यूचुअल फंड का इस्तेमाल पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य हर समय दूसरे एसेट से बेहतर रिटर्न देना नहीं होता, बल्कि निवेश के जोखिम को संतुलित करना होता है।
Gold ETF क्या होता है?
Gold ETF ऐसा निवेश विकल्प है जो बाजार में मौजूद घरेलू सोने की कीमत को ट्रैक करता है। SEBI के नियमों के अनुसार, Gold ETF अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 95 फीसदी हिस्सा गोल्ड और उससे जुड़े मान्य इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं।
Gold ETF की एक यूनिट की कीमत बाजार में सोने की घरेलू कीमत के आधार पर तय होती है। हालांकि, खर्च, ट्रैकिंग एरर और बाजार की स्थिति की वजह से ETF के रिटर्न और सोने की कीमत में थोड़ा अंतर हो सकता है।
Gold ETF स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं, इसलिए निवेशक बाजार के समय इन्हें खरीद या बेच सकते हैं।
Gold FoF क्या होता है?
Gold Fund of Fund यानी Gold FoF एक म्यूचुअल फंड स्कीम होती है, जो सीधे फिजिकल गोल्ड खरीदने के बजाय Gold ETF की यूनिट्स में निवेश करती है।
SEBI के नियमों के अनुसार, Gold FoF अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 95 फीसदी हिस्सा किसी Gold ETF की यूनिट्स में निवेश करता है।
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क्योंकि FoF, Gold ETF में निवेश करता है, इसलिए इसका प्रदर्शन सोने की कीमत, ETF के खर्च और दोनों के ट्रैकिंग अंतर से प्रभावित होता है।
Gold Mutual Fund के 4 फायदे
1. इक्विटी से अलग हो सकता है प्रदर्शन
Gold ETF और Gold FoF का इस्तेमाल पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने के लिए किया जाता है। सोने का प्रदर्शन अक्सर शेयर बाजार और कई डेट इंस्ट्रूमेंट्स से अलग रहा है।
बाजार में अनिश्चितता के समय कुछ निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं। इससे इक्विटी में ज्यादा निवेश वाले पोर्टफोलियो का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार शेयर बाजार गिरने पर सोना बढ़ेगा।
2. महंगाई से बचाव में मदद
महंगाई बढ़ने पर पैसे की खरीद क्षमता कम हो जाती है। ऐसे समय में गोल्ड लंबे समय में वैल्यू बनाए रखने में मदद कर सकता है।
सोने की कीमत पर महंगाई, आर्थिक अनिश्चितता, करेंसी में बदलाव और मांग जैसे कई कारणों का असर पड़ता है। हालांकि, सोने की कीमत में गिरावट भी आ सकती है और इसे महंगाई से बचाव की गारंटी नहीं माना जा सकता।
3. अलग तरह का एसेट
गोल्ड की अपनी अलग विशेषताएं होती हैं। यह किसी कर्ज लेने वाले या जारीकर्ता की भुगतान क्षमता पर निर्भर नहीं करता, जैसा कि डेट इंस्ट्रूमेंट्स में होता है।
Gold ETF और Gold FoF के जरिए निवेशक फिजिकल गोल्ड रखे बिना गोल्ड मार्केट में निवेश कर सकते हैं।
4. एक ही आर्थिक स्थिति पर निर्भरता कम
अगर किसी पोर्टफोलियो में सिर्फ इक्विटी या डेट निवेश ज्यादा है तो वह किसी एक आर्थिक परिस्थिति पर ज्यादा निर्भर हो सकता है।
सोने की कीमत पर दुनिया भर की मांग और वैश्विक हालात जैसे कई कारणों का असर पड़ता है। ऐसे में गोल्ड म्यूचुअल फंड आपके निवेश को अलग-अलग परिस्थितियों में संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं।

