
बैंकों की हालत सुधरी! NPA 6% से गिरकर 0.4% पहुंचा, लेकिन सामने हैं ये बड़ी चुनौतियां
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। खराब कर्ज का बोझ घटा है और कर्ज बांटने की रफ्तार भी मजबूत हुई है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है, जहां बैंकों के सामने कुछ नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। पूरी कहानी जानें।

In Short
- ब्रोकरेज ने Cellecor Gadgets के शेयर पर दिया Buy Call और ₹90 का टारगेट प्राइस बताया है।
- रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा स्तर से शेयर में 161% तक तेजी की संभावना जताई गई है।
- कंपनी के गैजेट्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार को देखते हुए निवेशकों की नजर स्टॉक पर बनी हुई है।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में काफी सुधरी है। बैंकों की एसेट क्वालिटी में बड़ा सुधार देखने को मिला है। अप्रैल से जून तिमाही के हालिया आंकड़ों के मुताबिक देश के लिस्टेड सरकारी और निजी बैंकों का नेट NPA यानी फंसे हुए कर्ज का स्तर 1 फीसदी से नीचे आ गया है।
Zerodha Capital के आंकड़ों के अनुसार 30 शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों का नेट NPA जून तिमाही में घटकर सिर्फ 0.4 फीसदी रह गया है। यह वित्त वर्ष 2018 में करीब 6 फीसदी के ऊंचे स्तर से काफी कम है।
डबल डिजिट में बढ़ रहा कर्ज
बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ यानी कर्ज देने की रफ्तार भी लगातार मजबूत बनी हुई है। पिछले कई तिमाहियों से कर्ज की ग्रोथ डिपॉजिट ग्रोथ से आगे चल रही है।
India Ratings and Research ने वित्त वर्ष 2026 के लिए क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। पहले यह अनुमान 13 फीसदी रखा गया था। वहीं वित्त वर्ष 2026-27 के लिए डिपॉजिट ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाकर 13.6 फीसदी कर दिया गया है, जो पहले 11.4 फीसदी था।
FCNR (B) डिपॉजिट से मिला सहारा
डिपॉजिट ग्रोथ को फिलहाल FCNR (B) डिपॉजिट से मजबूती मिली है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए स्पेशल कंसेशनल स्वैप विंडो शुरू की गई थी, जिसके बाद बैंकों में विदेशी मुद्रा जमा बढ़ी है।
RBI के आंकड़ों के मुताबिक 22 अगस्त तक FCNR (B) डिपॉजिट के जरिए करीब 65.4 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। हालांकि यह बढ़ोतरी अस्थायी मानी जा रही है और आगे डिपॉजिट ग्रोथ 11 से 13 फीसदी के बीच सामान्य हो सकती है।
बैंकों के सामने दो बड़ी चुनौतियां
हालांकि बैंकिंग सेक्टर के सामने आने वाले समय में कुछ चुनौतियां भी हैं। पहली चुनौती लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो की है। India Ratings के मुताबिक पिछली तिमाही में यह करीब 85 फीसदी रहा, जो कई तिमाहियों में सबसे ऊंचे स्तर पर है।
इसके अलावा बैंकों के मुनाफे पर भी दबाव बना रह सकता है। India Ratings के फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस हेड करण गुप्ता के मुताबिक सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव कम नेट इंटरेस्ट मार्जिन और बढ़ती क्रेडिट कॉस्ट की वजह से आ सकता है।

क्रेडिट कॉस्ट बढ़ने का अनुमान
India Ratings का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में बैंकिंग सिस्टम की क्रेडिट कॉस्ट बढ़कर 74 बेसिस प्वाइंट तक पहुंच सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष में 65 बेसिस प्वाइंट थी।
प्राइवेट बैंकों के लिए क्रेडिट कॉस्ट 95 बेसिस प्वाइंट तक रहने का अनुमान है, जबकि सरकारी बैंकों के लिए यह करीब 60 बेसिस प्वाइंट रहने की उम्मीद है।
NBFC सेक्टर पर भी दबाव
बैंकों की तरह नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों यानी NBFC के मुनाफे पर भी हल्का दबाव रहने की संभावना है। इसकी वजह कम NIM और ज्यादा क्रेडिट कॉस्ट को बताया गया है।
बड़ी NBFC कंपनियों के पास पर्याप्त पूंजी भंडार हो सकता है, लेकिन छोटी कंपनियों को ग्रोथ के लिए पूंजी जुटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरी छमाही में सामान्य हो सकती है कर्ज की रफ्तार
India Ratings के अनुसार मार्जिन पर दबाव, कम स्प्रेड और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट व बल्क डिपॉजिट पर बढ़ती निर्भरता की वजह से वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में लोन ग्रोथ सामान्य हो सकती है।
हालांकि कम फंडिंग कॉस्ट और बेहतर एसेट मिक्स से आने वाले समय में बैंकों के मार्जिन में सुधार की उम्मीद जताई गई है।

