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ट्रंप की ईरान को नई धमकी से बढ़ा तेल संकट, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार पहुंचा, सप्लाई पर चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप की नई चेतावनी और ताजा मिसाइल हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। हालांकि, दोनों देश फिलहाल पूर्ण युद्ध से बचने के संकेत दे रहे हैं।

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In Short

  • ट्रंप की ईरान पर और हमले करने की धमकी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, ब्रेंट क्रूड 90.49 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
  • ईरान ने अमेरिकी हमले के जवाब में जॉर्डन स्थित दो अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइलें दागीं, जबकि अमेरिका ने इसे सीमित और सटीक कार्रवाई बताया।
  • अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए सेकेंडरी प्रतिबंधों की तैयारी की, वहीं ईरान ने बातचीत से समाधान की इच्छा जताई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर और हमले करने की धमकी के बाद वैश्विक तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 2.39 डॉलर यानी 2.71% बढ़कर 90.49 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 91.52 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो 25 अगस्त के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2.36 डॉलर यानी 2.83% चढ़कर 85.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

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अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी सप्लाई को लेकर चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब छठे महीने में प्रवेश कर चुका है। हाल के दिनों में सैन्य टकराव के साथ-साथ यह संकट प्रतिबंधों, नाकेबंदी और तेल आपूर्ति पर दबाव के रूप में भी सामने आया है। ताजा हमलों ने दिखाया है कि दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से सैन्य कार्रवाई में बदल सकता है।

ईरान ने अमेरिका के ईरान के लारक द्वीप पर किए गए हमले के जवाब में जॉर्डन स्थित दो अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइलें दागीं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की उन दो लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया, जहां से होरमुज जलडमरूमध्य में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें तैनात करने की तैयारी देखी गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस कार्रवाई को “सीमित और सटीक” हमला बताया और इसे जलडमरूमध्य में पैदा हुए “तत्काल खतरे” के जवाब के तौर पर पेश किया।

ट्रंप ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

ट्रंप ने कहा, “हम उन्हें कड़ा जवाब देंगे” और “इसका जवाब दिया जाएगा।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नए हमले पूर्ण युद्ध की वापसी का संकेत नहीं हैं। ट्रंप ने ईरान को कमजोर अर्थव्यवस्था और सेना वाला “असफल राष्ट्र” बताया। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर कहा कि इसकी कोई वजह नहीं है क्योंकि ईरान “सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित” हो चुका है।

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मौजूदा टकराव को “सीमित और नियंत्रित संघर्ष” बताया, लेकिन चेतावनी दी कि दोबारा हमला हुआ तो जवाब कड़ा होगा।

तेल ढांचे पर हमले से बच रहा अमेरिका

अमेरिका ने अभी तक ईरान के प्रमुख तेल और गैस ढांचे को निशाना नहीं बनाया है। तेहरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि ऐसे हमलों से खाड़ी देशों पर बड़े हमले हो सकते हैं। अमेरिका ने इसके बजाय ईरानी तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंधों का दबाव बढ़ाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंधों के असर के कारण ईरान “बौखला रहा है।” उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका हर हफ्ते नए सेकेंडरी प्रतिबंध जारी कर सकता है, जिनकी शुरुआत बैंकिंग क्षेत्र से होगी।

इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बातचीत के जरिए समाधान का समर्थन किया। किर्गिस्तान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि युद्ध जारी रखना ईरान, क्षेत्र और मानवता के हित में नहीं है

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