तेल-गैस की खोज में ONGC का मेगा प्लान! 5 साल में ₹1 लाख करोड़ निवेश से 87 डीपवॉटर कुओं की ड्रिलिंग तेज करेगी कंपनी
तेल और गैस की खोज को लेकर ONGC ने अगले पांच साल के लिए बड़ा निवेश प्लान तैयार किया है। कंपनी डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों पर फोकस बढ़ाएगी। इसके तहत बड़ी संख्या में नए कुओं की ड्रिलिंग की जाएगी। सरकार की मंजूरी और नई तकनीक के सहारे यह अभियान कंपनी के लिए अहम माना जा रहा है।

सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ONGC अगले पांच साल में करीब ₹1 लाख करोड़ का निवेश करने की योजना बना रही है। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर परिसंपत्तियों की खोज और विकास तेज करने में करेगी। ONGC का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक 87 कुओं की ड्रिलिंग करना है। कंपनी ने यह जानकारी AGM के मीडिया इंटरैक्शन में अपनी प्रस्तुति के दौरान दी।
FY31 तक 87 कुओं की ड्रिलिंग
ONGC के मुताबिक, डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में करीब 5.6 मिलियन टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) के संभावित तेल और गैस भंडार की पहचान हुई है। कंपनी अगले कुछ वर्षों में ड्रिलिंग की रफ्तार काफी बढ़ाएगी।
योजना के मुताबिक FY26 में चार डीपवॉटर कुएं, FY27 में आठ, FY28 में 10, FY29 में 20, FY30 में 22 और FY31 में 27 कुओं की ड्रिलिंग की जाएगी। ONGC ने इस अभियान को दुनिया के सबसे बड़े डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन कार्यक्रमों में से एक बताया है।
इस कार्यक्रम को ‘समुद्र मंथन’ नाम दिया गया है, जिसे अगस्त 2025 में शुरू किया गया था।
सरकार से ₹84,084 करोड़ की मंजूरी
डीपवॉटर अभियान को सरकार का भी समर्थन मिला है। ONGC की प्रस्तुति के अनुसार, भारत सरकार ने नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम के तहत ‘समुद्र मंथन’ के लिए ₹84,084 करोड़ के खर्च को मंजूरी दी है।
इसमें FY26-27 का तैयारी चरण और FY27-28 से FY30-31 तक कार्यक्रम का क्रियान्वयन शामिल है। ONGC फिलहाल प्रस्तावित ड्रिलिंग के लिए सर्वे और दूसरी तैयारियां कर रही है।
AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल
कंपनी डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी करेगी। हालांकि, ONGC ने साफ किया है कि सर्वे और एक्सप्लोरेशन के नतीजों के आधार पर ड्रिलिंग योजना में बदलाव किया जा सकता है।
यह अभियान कंपनी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह नए हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों की तलाश कर रही है। ONGC के पुराने फील्ड्स में उत्पादन प्राकृतिक रूप से घट रहा है। मैनेजमेंट प्रेजेंटेशन के मुताबिक, कंपनी के मौजूदा उत्पादन में वेस्टर्न ऑफशोर परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई है।
सालाना ₹30,000 करोड़ से ज्यादा का कैपेक्स
डीपवॉटर विस्तार के साथ ONGC सालाना ₹30,000 करोड़ से ज्यादा का पूंजीगत खर्च बनाए रखने की योजना पर भी आगे बढ़ रही है। कंपनी ने FY26 में ₹35,000 करोड़ से ज्यादा निवेश किया और FY27 में ₹30,000 करोड़ से ज्यादा खर्च करने की योजना है।

