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7.8% GDP ग्रोथ ने बढ़ाई उम्मीद, भारत में निजी कैपेक्स बढ़ने से अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया बूस्ट

ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक जून तिमाही में मजबूत आर्थिक वृद्धि, उद्योगों को बढ़ता बैंक कर्ज और कंपनियों की नई निवेश योजनाएं संकेत दे रही हैं कि सरकारी खर्च के साथ निजी क्षेत्र भी ग्रोथ का नया इंजन बन सकता है।

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भारत की अर्थव्यवस्था में लंबे समय से इंतजार किया जा रहा निजी निवेश चक्र अब रफ्तार पकड़ता दिख रहा है। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक जून तिमाही में मजबूत आर्थिक वृद्धि, उद्योगों को बढ़ता बैंक कर्ज और कंपनियों की नई निवेश योजनाएं संकेत दे रही हैं कि सरकारी खर्च के साथ निजी क्षेत्र भी ग्रोथ का नया इंजन बन सकता है।

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7.8% की तेज आर्थिक वृद्धि

जून में खत्म हुई तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी। मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और सर्विसेज ने इसमें अहम भूमिका निभाई, जबकि घरेलू मांग भी मजबूत बनी रही। मार्च तिमाही की ग्रोथ को भी संशोधित कर 8.6% कर दिया गया।

ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन 11.9% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछली तिमाही के 10.8% से ज्यादा है और अब जीडीपी के एक-तिहाई से कुछ अधिक हिस्से के बराबर है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अर्थशास्त्री सौम्या कांति घोष ने कहा कि निवेश काफी हो रहा है, लेकिन बड़े ऐलानों के बजाय छोटे निवेशों के रूप में। उनके मुताबिक निजी क्षेत्र ने हाल के वर्षों में रिन्यूएबल एनर्जी और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश किया है। उन्होंने वित्त वर्ष की ग्रोथ का अनुमान 70 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 7.3% कर दिया है।

कंपनियों का निवेश और बैंक कर्ज बढ़ा

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया है। सड़क, बंदरगाह और पुलों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च के बीच कंपनियां भी निवेश के लिए आगे बढ़ रही हैं।

इंडस्ट्री और सर्विसेज को बैंक कर्ज हाल के महीनों में तेज हुआ है। जुलाई में मीडियम साइज कारोबारों को बैंक लोन रिकॉर्ड 4.8 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो एक साल पहले से 30% ज्यादा है। टाटा स्टील और अडानी ग्रुप ने भी मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश योजनाओं का ऐलान किया है।

निजी कैपेक्स अभी शुरुआती दौर में

मॉर्गन स्टेनली की अर्थशास्त्री उपासना चाचरा और बानी गंभीर ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और निवेश गतिविधि भारत को कैपेक्स अप-साइकिल के मुहाने पर दिखाती है। उन्होंने भी वित्त वर्ष की ग्रोथ का अनुमान 7.3% किया है।

मैन्युफैक्चरिंग जून तिमाही में 9.2% बढ़ी, जबकि कंस्ट्रक्शन 7.7% और बिजली उत्पादन 8.9% बढ़ा। सर्विसेज में 10% की वृद्धि हुई और वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज 12.1% बढ़ीं। एक्सपोर्ट भी 12% बढ़ा।

हालांकि, पिरामल ग्रुप के डेबोपम चौधरी ने कहा कि निजी कैपेक्स में तेजी हाल में ही शुरू हुई है। उनके मुताबिक रिकवरी उत्साहजनक है, लेकिन अभी शुरुआती दौर में है और इसे टिकाऊ बनाने के लिए वित्तीय परिस्थितियों का समर्थन जरूरी है।

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ग्रोथ की चुनौती अभी बड़ी

मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी फिलहाल अर्थव्यवस्था में 17% है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25% का लक्ष्य रखा है। मजबूत निवेश जारी रहा तो भारत के वित्त वर्ष 2027 में 7% से ज्यादा बढ़ने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए इससे भी तेज और लंबे समय तक आर्थिक विस्तार जरूरी होगा।