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Monsoon 2026: Skymet का अनुमान, कमजोर पड़ सकता है मानसून, जुलाई में राहत की उम्मीद

देश के किसानों और बाजारों की नजर अब मानसून की चाल पर टिक गई है। मौसम एजेंसी Skymet ने इस बार बारिश कमजोर रहने की आशंका जताई है, जिससे खरीफ फसलों, गन्ना उत्पादन और खाद्य महंगाई पर असर पड़ सकता है। हालांकि आने वाले हफ्तों में मानसून के फिर सक्रिय होने की उम्मीद भी बनी हुई है।

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Monsoon 2026: Skymet
AI Image: Monsoon 2026

In Short

  • Monsoon 2026: Skymet ने बढ़ाई चिंता,
  • कमजोर मानसून का खतरा, Skymet बोला- 84-85% LPA तक जा सकती है बारिश
  • Monsoon 2026: जून में 42% कम बारिश, जुलाई से राहत की उम्मीद
  • Skymet Forecast: अगस्त में मानसून ब्रेक का खतरा, खेती पर बढ़ी नजर
  • अल नीनो से मानसून पर दबाव, गन्ना और रबी फसलों को हो सकता है नुकसान

भारत में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहने की उम्मीद है। Skymet के मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन विभाग के अध्यक्ष जी.पी. शर्मा ने कहा है कि "2026 में मॉनसून बारिश long-period average यानी LPA के 90% से भी नीचे जा सकती है। यह अनुमान भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान से कम है, जिसने बारिश को LPA के 90% पर रहने का अनुमान लगाया है।"

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All India Sugar Trade Association के वेबिनार में शर्मा ने कहा कि Skymet के कई मॉडल इस समय मानसून बारिश को LPA के करीब 84-85% के आसपास दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

जून में बारिश 42% कम, जुलाई से राहत की उम्मीद

1 जून से अब तक भारत में 57.4 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य 99.2 मिलीमीटर से 42% कम है। इसके बावजूद शर्मा ने कहा कि आने वाले हफ्तों में मॉनसून फिर सक्रिय हो सकता है। उनके अनुसार जुलाई की बारिश जून की तुलना में काफी बेहतर रह सकती है। हालांकि अगस्त को लेकर जोखिम बना हुआ है। शर्मा ने कहा कि अगस्त में आमतौर पर मॉनसून ब्रेक आते हैं और इस बार अल नीनो की स्थिति के कारण ये ब्रेक ज्यादा मजबूत हो सकते हैं। उन्होंने जून से सितंबर की तस्वीर समझाते हुए कहा कि पहला महीना खराब रहा, दूसरा बेहतर हो सकता है, जबकि तीसरा और चौथा महीना जोखिम में रहेंगे।

खरीफ बुवाई में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं

कम बारिश के बावजूद अब तक खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल से थोड़ी अधिक है। कृषि अर्थशास्त्री और टेक्नोलॉजी रणनीतिकार दीपक पारीक ने कहा कि कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार खरीफ बुवाई में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आई है। शुक्रवार तक देशभर में खरीफ रकबा 12.0 मिलियन हेक्टेयर रहा, जो सालाना आधार पर 1.7% अधिक है। धान की बुवाई 53% बढ़ी है, जबकि कपास रकबा 25% कम है। दालों का रकबा अब 13% अधिक हो गया है, लेकिन तिलहन रकबा करीब 11% कम है।

गन्ना, रबी फसल और महंगाई पर असर

कृषि विशेषज्ञ जी.के. सूद ने कहा कि गन्ने के लिए हालात अनुकूल नहीं हैं। उनके अनुसार अगर अगस्त-सितंबर की बारिश कमजोर रही तो गन्ना उत्पादन घटकर 390 मिलियन टन रह सकता है। रबी फसलों पर भी El Nino का असर दिख सकता है। शर्मा ने कहा कि उत्तर भारत और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में तापमान बढ़ने, बारिश और बर्फबारी घटने से गेहूं और चना जैसी रबी फसलों पर दबाव आ सकता है। Arcus Policy Research की संस्थापक और CEO श्वेता सैनी ने कहा कि El Nino के कारण ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई शहरी क्षेत्रों से अधिक रह सकती है।

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