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राजस्थान में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे मंत्री, जानिए क्या है मामला

वन मंत्री संजय शर्मा अपनी ही सरकार के तहत काम कर रहे अधिकारियों के खिलाफ सफाई कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए। मामला उनके विभाग से जुड़ा भी नहीं था, लेकिन अलवर नगर निगम में शुरू हुआ यह धरना चार घंटे में लंबे समय से अटके मुद्दे पर समाधान की वजह बन गया।

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राजस्थान में एक असामान्य सियासी तस्वीर सामने आई। वन मंत्री संजय शर्मा अपनी ही सरकार के तहत काम कर रहे अधिकारियों के खिलाफ सफाई कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए। मामला उनके विभाग से जुड़ा भी नहीं था, लेकिन अलवर नगर निगम में शुरू हुआ यह धरना चार घंटे में लंबे समय से अटके मुद्दे पर समाधान की वजह बन गया।

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नियुक्ति पत्र के लिए सात साल से इंतजार

सफाई कर्मचारियों का कहना था कि 2012 की भर्ती प्रक्रिया में चयन के बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिले। वे पिछले सात साल से अलवर नगर निगम में काम कर रहे हैं और लगातार नियुक्ति पत्र की मांग कर रहे थे। नगर निकाय चुनाव नजदीक आने के बीच कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार कर धरना शुरू कर दिया।

मामले की जानकारी मिलने पर संजय शर्मा भी धरने में शामिल हो गए। उन्होंने साफ कहा कि कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र मिलने तक वह वहां से नहीं हटेंगे। शर्मा ने देरी के लिए अलवर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को जिम्मेदार ठहराया।

CMO के दखल के बाद पांच को नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद अधिकारियों ने पांच कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए। बाकी मामलों पर फैसला लेने के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा हुई, जिसके बाद शर्मा ने धरना खत्म किया।

वन मंत्री के मुताबिक, पांच कर्मचारियों की फाइलें तैयार थीं, इसलिए उन्हें तत्काल पत्र दिए गए। उन्होंने कहा कि बाकी पात्र उम्मीदवारों को 16 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जुड़े कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।

शर्मा ने जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप भी लगाया। उनके मुताबिक, राजस्थान हाईकोर्ट ने पिछले साल 2012 की भर्ती के सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देने का आदेश दिया था और 69 उम्मीदवारों को पत्र जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी, लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया।

कांग्रेस ने सरकार को घेरा

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब सरकार का मंत्री ही धरने पर बैठ रहा है और प्रशासन पर सवाल उठा रहा है, तो यह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करता है।