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सीबीएसई के OSM सिस्टम NSUI ने खटखटाया दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा, लगाई ये बड़ी गुहार

NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में PIL दाखिल कर स्कैन कॉपी, गायब पेज, कम अंक और तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायत उठाई है। छात्र संगठन ने मैन्युअल जांच, वेरिफिकेशन प्रक्रिया दोबारा खोलने और डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

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नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने CBSE के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की है। छात्र संगठन ने दावा किया है कि Class XII बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट घोषित होने के बाद देशभर के हजारों छात्रों को मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

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याचिका में NSUI ने विवादित मामलों में आंसर शीट की मैन्युअल जांच, वेरिफिकेशन प्रक्रिया दोबारा खोलने और डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

इसके अलावा NSUI ने हाईकोर्ट से प्रभावित छात्रों के लिए वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन पोर्टल एक महीने और खुला रखने की मांग की है। इसके अलावा विवादित मामलों में फिजिकल वेरिफिकेशन और मैन्युअल रीचेकिंग कराने की भी अपील की गई है।

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याचिका में OSM सिस्टम की तकनीकी खामियों और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच के साथ भविष्य के डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस बनाने की मांग भी शामिल है।

NSUI ने यह भी कहा कि जिन छात्रों की आंसर शीट धुंधली, गायब या गलत तरीके से मूल्यांकित पाई जाएं, उन्हें अतिरिक्त अंक दिए जाएं।

छात्रों ने उठाए कई तकनीकी सवाल

याचिका के मुताबिक छात्रों ने धुंधली स्कैन कॉपियां, गायब पेज, अधूरी अपलोडिंग, उत्तर पुस्तिकाओं का मिसमैच, उम्मीद से कम अंक और वेरिफिकेशन पोर्टल तक पहुंच में परेशानी जैसी शिकायतें दर्ज कराईं।

NSUI ने अदालत से कहा कि Class XII के नतीजे कॉलेज एडमिशन, स्कॉलरशिप और आगे की पढ़ाई के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी तरह की गलती छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर डाल सकती है।

CBSE ने भी मानी थीं तकनीकी दिक्कतें

याचिका में कहा गया है कि रिजल्ट जारी होने के बाद CBSE ने खुद कई सार्वजनिक नोटिस जारी कर पोर्टल में तकनीकी खामियों को स्वीकार किया था। बोर्ड ने स्कैन कॉपियों तक पहुंच से जुड़ी समस्याओं के कारण समयसीमा भी कई बार बढ़ाई।

दस्तावेजों के अनुसार करीब 1.27 लाख आवेदन आए, जिनमें लगभग 3.87 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियां मांगी गईं। NSUI का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या छात्रों के बीच मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर व्यापक चिंता दिखाती है।

मैन्युअल वेरिफिकेशन की मांग

याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिन छात्रों की कॉपियां सही तरीके से स्कैन हुईं और जिनकी स्कैनिंग में तकनीकी समस्या आई, उनके साथ अलग-अलग व्यवहार हो रहा है।

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NSUI ने कहा कि छात्रों को उस डिजिटल सिस्टम की खामियों की सजा नहीं मिलनी चाहिए, जिसे खुद अधिकारियों ने लागू किया है। छात्र संगठन ने यह भी दावा किया कि मौजूदा शिकायत निवारण व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, क्योंकि स्कैन कॉपी पर विवाद होने की स्थिति में मैन्युअल जांच का प्रभावी विकल्प मौजूद नहीं है।