कॉलेज दे रहे सिर्फ डिग्री! नौकरी के लिए तैयार नहीं हो रहे युवा, निर्मला सीतारमण ने बताई शिक्षा सिस्टम की कमी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कॉलेज छात्रों को सिर्फ डिग्री दे रहे हैं, लेकिन नौकरी या अपना काम शुरू करने के लिए जरूरी तैयारी नहीं कर रहे। उन्होंने स्किल आधारित पढ़ाई और सिस्टम में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

In Short
- निर्मला सीतारमण ने कहा कॉलेज युवाओं को नौकरी और एंटरप्रेन्योरशिप के लिए तैयार नहीं कर रहे हैं।
- वित्त मंत्री ने कहा मौजूदा सिस्टम से डिग्री रखने वाले युवा निकल रहे हैं लेकिन जरूरी स्किल की कमी है।
- उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में माइंडसेट बदलाव और स्किल आधारित कोर्स बढ़ाने की जरूरत बताई।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारतीय कॉलेज छात्रों को नौकरी या अपना काम शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं कर पा रहे हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा सिस्टम से बड़ी संख्या में ऐसे युवा निकल रहे हैं जिनके पास सिर्फ डिग्री है, लेकिन रोजगार के लिए जरूरी स्किल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है ताकि छात्र बाजार की जरूरतों के हिसाब से तैयार हो सकें।
कॉलेजों में पढ़ाई और नौकरी के बीच बड़ा अंतर
द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में निर्मला सीतारमण ने कहा कि ज्यादातर छात्र कॉलेज से ग्रेजुएशन तो कर लेते हैं, लेकिन कॉलेज उन्हें नौकरी के लिए तैयार नहीं करते। उन्होंने कहा कि कॉलेज छात्रों को एंटरप्रेन्योर बनने के लिए भी जरूरी तैयारी नहीं कराते। उनके अनुसार छात्र सिर्फ किसी के लिए काम करने तक सीमित नहीं हैं, वे अपना काम भी शुरू कर सकते हैं, लेकिन मौजूदा कोर्स उन्हें इसके लिए पर्याप्त जानकारी और ट्रेनिंग नहीं देते।
विदेशों के कॉलेजों से तुलना की
वित्त मंत्री ने कहा कि विकसित देशों में छात्रों को अपनी पसंद के विषय चुनने के साथ ही टेक्निकल यूनिवर्सिटी या स्किल आधारित कोर्स करने का विकल्प मिलता है। वहां छात्रों को किसी खास स्किल को सीखने के साथ यह भी बताया जाता है कि उस स्किल का इस्तेमाल कैसे करना है और उसमें आगे कैसे बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की पढ़ाई छात्रों को मार्केट के लिए तैयार करती है। इससे वे या तो किसी कंपनी में नौकरी कर सकते हैं या फिर खुद कुछ शुरू कर सकते हैं।
डिग्री मिल रही है लेकिन स्किल की कमी
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत के यूनिवर्सिटी कोर्स में यह व्यवस्था नहीं है। यहां छात्रों को किसी विषय की बैचलर डिग्री मिल जाती है, लेकिन उसके बाद आगे का रास्ता साफ नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी छात्र ने इकोनॉमिक्स या पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की है तो उसे आगे क्या करना है, यह स्पष्ट नहीं होता।
उन्होंने कहा कि बीए के बाद छात्र एमए करते हैं, लेकिन एमए के बाद भी उन्हें किसी खास स्किल या काम से जुड़ने की जरूरत होती है।
शिक्षा व्यवस्था में माइंडसेट बदलने की जरूरत
वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा सिस्टम ऐसे युवाओं को तैयार कर रहा है जो सर्टिफिकेट या डिग्री तो रखते हैं, लेकिन नौकरी करने या खुद कुछ शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होते। उन्होंने कहा कि इस समस्या को ठीक करने के लिए स्कूल और कॉलेज सिस्टम में ओवरहॉल की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि बदलाव के लिए सिर्फ पैसा खर्च करना काफी नहीं होगा, बल्कि सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है।
छात्रों के प्रदर्शन पर भी रखी बात
जंतर मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन पर बोलते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब जो हो चुका है उस पर पीछे जाकर बात करने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कहना आसान है कि चीजों को अलग तरीके से संभाला जा सकता था, लेकिन अब आगे की स्थिति को देखते हुए काम करना होगा।

