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नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद 96 अज्ञात शव दफन, DNA सैंपल से होगी मृतकों की पहचान

नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद हालात बेहद गंभीर हैं। चितवन का एक जंगल अब अज्ञात शवों को दफनाने की जगह बन गया है। सैकड़ों शव नदियों और मलबे से निकाले गए हैं। पहचान मुश्किल होने के कारण DNA सैंपल लिए जा रहे हैं, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं।

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In Short

  • नेपाल के चितवन जिले का देवघाट जंगल अब अज्ञात बाढ़ पीड़ितों को दफनाने की जगह बन गया है।
  • शनिवार तक नेपाल में मरने वालों की संख्या 788 पहुंची, जबकि 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
  • अज्ञात शवों के DNA सैंपल लिए जा रहे हैं, ताकि बाद में परिवार उनकी पहचान कर सकें।

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद अब मृतकों की पहचान बड़ी चुनौती बन गई है। चितवन जिले का देवघाट जंगल, जहां लोग कभी सुबह टहलने आते थे, अब बड़ी संख्या में अज्ञात बाढ़ पीड़ितों का कब्रिस्तान बन गया है। बाढ़ प्रभावित रसुवा की घाटियों से करीब 200 किलोमीटर दूर इस जंगल में सैकड़ों कब्रें खोदी गई हैं।

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भोटेकोशी नदी में बहकर आए कई शव बुरी तरह सड़ चुके हैं। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, चितवन प्रशासन ने शनिवार को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 96 अज्ञात शव दफनाए। रविवार को 100 से ज्यादा अन्य शवों को दफनाने की तैयारी थी।

 DNA सैंपल से होगी पहचान

चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश आर्यल ने कहा कि तेजी से सड़ रहे शवों के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा देखते हुए इन्हें दफनाना जरूरी था। प्रशासन ने हर कब्र का सटीक स्थान दर्ज किया है और जमीन के ऊपर व नीचे पहचान के निशान लगाए हैं।दफनाने से पहले हर अज्ञात शव का DNA सैंपल भी लिया गया है। नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के मुताबिक, इससे बाद में परिवारों के दावों, सरकारी रिकॉर्ड या जेनेटिक टेस्ट के जरिए पहचान संभव होगी और जरूरत पड़ने पर शव निकालकर अंतिम संस्कार किया जा सकेगा।

पुलिस प्रवक्ता राजेंद्र प्रसाद धमाला के अनुसार, अब तक केवल 17 शवों की पहचान हो सकी है। कई शव पहचान से परे हैं या उनके अंग कटे हुए मिले हैं। भारत ने DNA विश्लेषण में विशेषज्ञता रखने वाली 18 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम नेपाल भेजी है।

 788 मौतें, 2,500 से ज्यादा लापता

नेपाल में शनिवार तक मृतकों का आंकड़ा 788 पहुंच गया था। 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 591 विदेशी शामिल हैं। करीब 9,500 लोगों को बचाया गया है।बाढ़ ने घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों के साथ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भी भारी नुकसान पहुंचाया। आठ चालू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए, जिनकी कुल क्षमता 354 MW है। नौ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े 537 कर्मचारी भी लापता बताए गए हैं।