पीएम मोदी की अपील से याद आया वो दौर, जब शास्त्री जी ने देश से मांगा था एक वक्त का उपवास - जानें पूरा किस्सा
पीएम मोदी द्वारा खाद्य तेल के इस्तेमाल में 10% की कटौती करने की अपील ने 1965 के उस दौर की यादें ताजा कर दी हैं, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश को अनाज संकट से उबारने के लिए 'हफ्ते में एक दिन उपवास' रखने का अनुरोध किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अपनी जीवनशैली में एक बड़ा बदलाव करने का आह्वान किया है। पश्चिम एशिया के संघर्ष और ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधाओं के चलते खाद्य तेल और ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में पीएम मोदी ने भारतीयों से खाद्य तेल (Edible Oil) के इस्तेमाल में 10% की कटौती करने की अपील की है।
पीएम मोदी की इस अपील ने 1965 के उस दौर की यादें ताजा कर दी हैं, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश को अनाज संकट से उबारने के लिए 'हफ्ते में एक दिन उपवास' रखने का अनुरोध किया था।
लाल बहादुर शास्त्री के 'उपवास' की यादें हुईं ताजा
सन 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान जब देश अन्न के संकट से जूझ रहा था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से हफ्ते में एक दिन का उपवास रखने का अनुरोध किया था। शास्त्री जी ने पहले खुद और अपने परिवार के साथ यह प्रयोग किया और फिर देश को बताया। आज करीब 60 साल बाद, पीएम मोदी की खाद्य तेल बचाने की अपील उसी 'राष्ट्र-प्रथम' की भावना को फिर से जीवित करती नजर आ रही है।
जब शास्त्री की एक आवाज पर थम गया था पूरा देश
शास्त्री जी की सादगी और ईमानदारी का असर ऐसा हुआ कि उनके एक आह्वान पर देश के करोड़ों लोगों ने स्वेच्छा से सोमवार का व्रत रखना शुरू कर दिया। यहां तक कि उस समय के मशहूर होटलों और रेस्टोरेंट्स ने भी सोमवार की शाम को दरवाजे बंद रखने का फैसला किया।
इस त्याग ने न केवल अनाज की कमी को दूर की, बल्कि पूरे देश को 'जय जवान, जय किसान' के नारे के नीचे एकजुट कर दिया। आज पीएम मोदी की 10% तेल बचाने की अपील उसी सामूहिक इच्छाशक्ति को फिर से जगाने की कोशिश है।
विदेशी मुद्रा पर बढ़ता बोझ
भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरतों का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और फर्टिलाइजर की बढ़ती कीमतों के बीच, खाद्य तेल का बढ़ता आयात बिल अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है।
पीएम मोदी की 10% कटौती की अपील का सीधा लक्ष्य भारत की आयात पर निर्भरता कम करना और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को मजबूती देना है। यह केवल बचत का मामला नहीं है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में देश की आर्थिक सुरक्षा का कवच तैयार करना है।
सेहत पर भी अच्छा असर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पीएम मोदी की यह अपील आर्थिक लाभ के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन हृदय रोगों और मोटापे का बड़ा कारण है। पीएम मोदी ने लोगों से स्वदेशी प्रोडक्ट्स अपनाने और स्थानीय तिलहन (जैसे सरसों, मूंगफली और सूरजमुखी) को बढ़ावा देने की बात कही है।

