scorecardresearch

कम बारिश के बाद महाराष्ट्र में बढ़ी चिंता, पानी बचाने के लिए सरकार ने उठाया ये कदम

महाराष्ट्र में कमजोर मानसून के बाद पानी को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने मुंबई समेत स्थानीय प्रशासन को पानी की खपत कम करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने खेती से लेकर फैक्ट्रियों तक पानी के इस्तेमाल को लेकर कई अहम फैसले किए हैं।

Advertisement

In Short

  • महाराष्ट्र में 16 अक्टूबर से पानी की खपत कम करने के निर्देश
  • जून-सितंबर के मानसून में लंबी अवधि के औसत से 12.6% कम बारिश
  • महाराष्ट्र के करीब तीन-चौथाई उप-जिलों में सूखे की स्थिति घोषित

महाराष्ट्र में कमजोर मानसून के बाद पानी की किल्लत बढ़ गई है। राज्य सरकार ने घरों में होने वाली पानी की सप्लाई में कम से कम 10% की कटौती करने का फैसला किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, शक्तिशाली अल नीनो की वजह से देश में एक दशक से ज्यादा समय का सबसे कमजोर मानसून देखने को मिला है।

advertisement

राज्य के जल संसाधन विभाग ने सोमवार को जारी बयान में बताया कि मुंबई समेत स्थानीय प्रशासन को 16 अक्टूबर से पानी की खपत कम करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर पानी की सप्लाई में और ज्यादा कटौती भी की जा सकती है, ताकि अगले साल अगस्त तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

पीने के पानी को मिलेगी प्राथमिकता

सरकार ने पानी के इस्तेमाल को लेकर प्राथमिकताएं भी तय की हैं। सबसे पहले पीने के पानी और इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा किया जाएगा। इसके बाद चारे और बीज उत्पादन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए पानी दिया जाएगा।

आने वाले सर्दियों के बुवाई सीजन के लिए अधिकारियों को ऐसी खाद्य फसलों को प्राथमिकता देने को कहा गया है, जिनमें पानी की जरूरत कम होती है और जिनसे ज्यादा चारा मिल सकता है। फैक्ट्रियों को भी अपने इस्तेमाल किए गए पानी में से कम से कम 30% को रीसाइकिल करने का आदेश दिया गया है।

महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर भी नजर

महाराष्ट्र देश की अर्थव्यवस्था में करीब 14% का योगदान देता है। राज्य में रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा ग्रुप और महिंद्रा एंड महिंद्रा समेत देश की कई बड़ी कंपनियां और बैंक मौजूद हैं। महाराष्ट्र गन्ना, गेहूं और कपास के प्रमुख उत्पादक राज्यों में भी शामिल है।

कम बारिश की वजह से जलाशयों में पानी का स्तर कम हुआ है। इससे चावल, गन्ना और सोयाबीन जैसी फसलों के साथ हाइड्रोपावर उत्पादन पर भी असर पड़ने का खतरा है। खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने का जोखिम भी बना हुआ है।

Image Credit: ITG

मानसून में 12.6% कम हुई बारिश

भारत में जून से सितंबर के मानसून के दौरान बारिश लंबी अवधि के औसत से 12.6% कम रही। यह 2015 के बाद सबसे बड़ी कमी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक दिसंबर तक तीन महीनों के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है।

महाराष्ट्र के तीन-चौथाई हिस्से में सूखे के हालात

महाराष्ट्र ने अपने 358 उप-जिलों में से करीब तीन-चौथाई में सूखे की स्थिति घोषित की है। राज्य ने 67 अरब रुपये से ज्यादा के राहत उपायों की घोषणा भी की है। इनमें किसानों के कर्ज का पुनर्गठन और ग्रामीण रोजगार के लिए इमरजेंसी फंड शामिल है।

advertisement

महाराष्ट्र के अलावा पड़ोसी कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने भी अपने कई उप-जिलों को सूखा प्रभावित बताया है। कर्नाटक में पांच दशकों का दूसरा सबसे खराब मानसून दर्ज किया गया है, जिसका असर कॉफी की खेती पर भी पड़ने की आशंका है।