
महाराष्ट्र में सूखे की मार, 265 इलाकों के किसानों को कर्ज और बिजली राहत देगी सरकार
महाराष्ट्र में कम बारिश और लंबे सूखे दौर के बाद सरकार ने 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के लिए कर्ज राहत, बिजली छूट, पानी और रोजगार सहायता समेत कई कदमों का ऐलान किया गया है। खरीफ फसलों पर सूखे का बड़ा असर पड़ा है।

In Short
- महाराष्ट्र सरकार ने कम बारिश और सूखे हालात को देखते हुए 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया।
- सूखे से प्रभावित किसानों के लिए कर्ज राहत, बिजली बिल में छूट और फसल नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दिए गए।
- कमजोर मानसून से सोयाबीन, कपास, बाजरा समेत खरीफ फसलों को नुकसान, कृषि उत्पादन और ग्रामीण आय पर चिंता बढ़ी।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 265 इलाकों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। राज्य के कुल 358 इलाकों में से करीब 74 फीसदी हिस्से को अब आपात राहत व्यवस्था के तहत लाया गया है। यह फैसला मानसून में कम बारिश और लंबे समय तक चले सूखे दौर को देखते हुए लिया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रभावित इलाकों का दौरा करने और हालात की समीक्षा के बाद यह घोषणा की। महाराष्ट्र कृषि आयुक्त की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर जारी सरकारी प्रस्ताव में बताया गया कि 265 इलाकों ने "ट्रिगर-1" मानदंड को पूरा किया है।
21 दिन तक बारिश नहीं होने वाले इलाके सूखे की श्रेणी में
"ट्रिगर-1" का मतलब है कि मानसून के दौरान लगातार 21 दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं होना। इन इलाकों में बारिश की कमी ने खेती को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
1 जून से सितंबर के मध्य तक महाराष्ट्र में कुल बारिश सामान्य से 18.8 फीसदी कम दर्ज की गई। मराठवाड़ा, पुणे और नासिक डिवीजन के कई जिलों में बारिश की कमी करीब 30 फीसदी तक रही।
वहीं धाराशिव, अमरावती, सोलापुर और लातूर जैसे कृषि प्रधान जिलों में बारिश की कमी 50 फीसदी तक पहुंच गई।
खरीफ फसलों को भारी नुकसान
कम बारिश का असर खरीफ सीजन की फसलों पर पड़ा है। सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तूर, मूंग और उड़द जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा है।
सरकार ने किसानों और ग्रामीण मजदूरों को राहत देने के लिए कई कदमों का ऐलान किया है।
किसानों के लिए कर्ज और टैक्स राहत
सरकार ने मौजूदा फसल कर्ज के पुनर्गठन का फैसला लिया है। इसके साथ ही कृषि कर्ज की वसूली पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। सूखाग्रस्त इलाकों में जमीन राजस्व भुगतान में भी रियायत दी जाएगी।

बिजली बिल और शिक्षा शुल्क में राहत
कृषि पंपों के बिजली बिलों के भुगतान में राहत और छूट दी जाएगी। साथ ही सूखा घोषित क्षेत्रों में किसानों के पंपों की बिजली सप्लाई काटने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।
प्रभावित इलाकों के स्कूल और कॉलेज छात्रों को परीक्षा शुल्क में पूरी छूट दी जाएगी।
पानी, चारा और रोजगार के लिए विशेष इंतजाम
पानी की कमी वाले गांवों में तुरंत टैंकरों के जरिए पेयजल पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पशुओं के लिए चारे और पशुधन देखभाल की व्यवस्था भी की जाएगी।
भूमिहीन मजदूरों को रोजगार देने के लिए मनरेगा के तहत राहत कार्यों को बढ़ाने के लिए नियमों में छूट दी जाएगी।
नुकसान का होगा जियो टैग के साथ सर्वे
सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को नुकसान का आकलन तुरंत पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पंचनामा प्रक्रिया में जियो टैग फोटो और जीपीएस लोकेशन ट्रैकिंग को अनिवार्य किया गया है, ताकि मुआवजे का वितरण पारदर्शी तरीके से हो सके।
कमजोर मानसून से बढ़ी चिंता
कमजोर मानसून का असर कृषि उत्पादन, ग्रामीण आय और खाद्य कीमतों पर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। भारत को अपनी सालाना बारिश का करीब 70 फीसदी हिस्सा जून से सितंबर के मानसून से मिलता है।
इस बार कमजोर बारिश और मजबूत हो रही अल नीनो परिस्थितियों के कारण फसल उत्पादन और महंगाई को लेकर चिंता जताई जा रही है।

