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लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा खुलासा! बिल्डिंग मालिक का नाम 2015 PMT पेपर लीक केस में भी आया था

लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक हादसे ने सबको झकझोर दिया है। 15 छात्रों की मौत के बाद अब सरकार ने जांच की कमान SIT को सौंपी है। क्या यह सिर्फ एक हादसा था या इसके पीछे है किसी बड़ी लापरवाही की कहानी? देखिए जांच में अब तक क्या-क्या बड़े खुलासे हुए हैं। पढ़ें पूरी खबर।

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In Short

  • 15 छात्रों की मौत के बाद को-ओनर सुरेंद्र शुक्ल का पुराना रिकॉर्ड चर्चा में।
  • 2015 के PMT पेपर लीक केस में सामने आया था सुरेंद्र शुक्ल का नाम।
  • बेटी को पास कराने के लिए पेपर लीक की साजिश का लगा था आरोप।

Lucknow fire: लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद अब बिल्डिंग के को-ओनर सुरेंद्र शुक्ल का पुराना रिकॉर्ड भी चर्चा में आ गया है। जानकारी के मुताबिक, उनका नाम साल 2015 के सीपीएमटी (PMT) पेपर लीक मामले में भी सामने आया था। इसके बाद इस पुराने मामले की फिर से चर्चा शुरू हो गई है।

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PMT पेपर लीक मामले में क्या आरोप थे?

जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र शुक्ल पर आरोप था कि उन्होंने अपनी बेटी को परीक्षा में पास कराने के लिए पेपर लीक कराने की साजिश रची थी। इस मामले में उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।

हालांकि, बाद में STF ने मामले की जांच की। जांच के दौरान उनके खिलाफ ऐसे पक्के सबूत नहीं मिले, जिनके आधार पर कार्रवाई की जा सके। इसी वजह से उन्हें इस मामले में राहत मिल गई थी।

बेटी को खास सुविधा दिलाने का भी आरोप

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई थी कि परीक्षा केंद्र में उनकी बेटी को खास सुविधा दिलाने की कोशिश की गई थी। लेकिन STF को इस मामले में भी पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसलिए उनके खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

प्रॉपर्टी कारोबार को लेकर भी लगे आरोप

सुरेंद्र शुक्ल और उनके भाई वीरेंद्र शुक्ल पर लंबे समय से प्रॉपर्टी के कारोबार को लेकर भी आरोप लगते रहे हैं। आरोप है कि दोनों भाइयों ने किसानों से कम दाम में जमीन खरीदी और बाद में उसकी प्लॉटिंग करके कारोबार किया।

बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग में यह अग्निकांड हुआ, उसके दूसरे मालिक वीरेंद्र शुक्ल हैं।

हादसे के बाद SIT करेगी जांच

अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत और कई छात्रों के घायल होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए दो सदस्यीय SIT बनाई गई है।

इस टीम में टूरिज्म डिपार्टमेंट के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। SIT को सात दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

किन बातों की होगी जांच?

SIT यह जांच करेगी कि बिल्डिंग का नक्शा सही तरीके से पास हुआ था या नहीं। इसके अलावा निर्माण में कोई गडबडी हुई थी या नहीं, बिजली का लोड सही था या नहीं और दूसरी तकनीकी कमियों की भी जांच की जाएगी।

टीम हादसे से जुडी हर छोटी-बडी बात की भी जांच करेगी।

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कई सवालों के जवाब तलाशेगी जांच

इस दर्दनाक हादसे के बाद बिल्डिंग के निर्माण, सुरक्षा के इंतजाम और प्रशासन की लापरवाही को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की नजर SIT की जांच पर है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो सकेगा कि हादसा कैसे हुआ और क्या कहीं नियमों का उल्लंघन किया गया था।