भारत-अमेरिका की मेगा ट्रेड डील अब बेहद करीब! ग्रीयर के दौरे के बीच आया बड़ा संकेत
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों ने पहले चरण के समझौते पर चर्चा तेज कर दी है। सरकार का कहना है कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और जल्द प्रगति हो सकती है।

In Short
- भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत तेज हो गई है।
- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, समझौते से जुड़े लगभग सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।
- सरकार को उम्मीद है कि जुलाई के मध्य तक ट्रेड डील के पहले चरण पर मुहर लग सकती है, जिससे दोनों देशों के व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर बातचीत अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों ने समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत तेज कर दी है।
अमेरिकी राजदूत ने जताया भरोसा
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि भारत और अमेरिका एक मजबूत व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक, यह समझौता दोनों देशों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा करेगा और आपसी आर्थिक रिश्तों को और मजबूत बनाएगा।
पीयूष गोयल और ग्रीयर के बीच अहम चर्चा
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर दो दिन के भारत दौरे पर हैं। इस दौरान उनकी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ व्यापार समझौते पर विस्तार से चर्चा हो रही है।
बीते सोमवार को पीयूष गोयल ने कहा था कि सरकार अमेरिका के साथ ऐसा समझौता करने पर काम कर रही है, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में फायदा मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि पहले चरण के समझौते से जुड़े लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। गोयल ने कहा, “लगभग सभी मुद्दे सुलझ चुके हैं।”
समझौते को अंतिम रूप देने में देरी क्यों हुई?
भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई थी। हालांकि, पहले चरण को अंतिम रूप देने में उम्मीद से ज्यादा समय लग गया।
गोयल के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पारस्परिक शुल्क (Reciprocal Tariffs) को अवैध करार दिए जाने के बाद समझौते के मसौदे में कुछ बदलाव करने पड़े। इसी वजह से बातचीत की प्रक्रिया लंबी हो गई।
जून में भी हुई थी महत्वपूर्ण बातचीत
जून की शुरुआत में भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली आया था। उस दौरान दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार, गैर-शुल्कीय बाधाओं (Non-Tariff Measures) और व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने जैसे कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई थी।
5 जून को गोयल ने उम्मीद जताई थी कि भारत और अमेरिका जुलाई के मध्य तक व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरा कर सकते हैं।
चुनौतियों के बावजूद मजबूत हैं व्यापारिक रिश्ते
व्यापारिक चुनौतियों और 2025-26 के बड़े हिस्से में भारत पर लागू 50% अमेरिकी शुल्क के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत बने हुए हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 132.14 अरब डॉलर का रहा। इसमें भारत ने अमेरिका को 86.51 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि अमेरिका से 45.63 अरब डॉलर का आयात किया।
समझौते से क्या बदल सकता है?
इन आंकड़ों से साफ है कि यह प्रस्तावित समझौता सिर्फ शुल्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है। अगर पहले चरण पर सहमति बनती है तो इससे दोनों देशों के कारोबार, निवेश और व्यापारिक अवसरों को बड़ा फायदा मिल सकता है।

