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Swiggy और Zomato से नाराज 21 हजार रेस्टोरेंट, 15 अगस्त से बहिष्कार की तैयारी

क्या 15 अगस्त के बाद बेंगलुरु में ऑनलाइन खाना मंगवाना मुश्किल हो सकता है? होटल संचालकों ने Swiggy और Zomato पर भारी कटौती और छिपे हुए चार्ज लगाने का आरोप लगाया है। अब हजारों रेस्टोरेंट ने बड़ा कदम उठाने की चेतावनी दी है। आखिर पूरा विवाद क्या है, जानिए।

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AI Generated Image

In Short

  • कर्नाटक होटल एसोसिएशन ने मांगें पूरी नहीं होने पर 15 अगस्त से Swiggy और Zomato के बहिष्कार की चेतावनी दी है।
  • एसोसिएशन का दावा है कि सभी कटौतियों के बाद रेस्टोरेंट को ऑर्डर की कीमत का सिर्फ 45 से 50 प्रतिशत भुगतान मिलता है।
  • बेंगलुरु के करीब 21 हजार रेस्टोरेंट इस विरोध में साथ आ सकते हैं और दूसरे ऐप से ऑर्डर लेने की तैयारी कर रहे हैं।

कर्नाटक होटल एसोसिएशन ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Swiggy और Zomato के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। एसोसिएशन का आरोप है कि कमीशन, डिस्काउंट और दूसरे चार्ज काटने के बाद रेस्टोरेंट को ऑर्डर की कुल कीमत का सिर्फ 45 से 50 प्रतिशत हिस्सा ही मिल पाता है। मांगें पूरी नहीं होने पर बेंगलुरु के हजारों रेस्टोरेंट 15 अगस्त से इन प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर लेना बंद कर सकते हैं।

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21 हजार रेस्टोरेंट बहिष्कार में हो सकते हैं शामिल

कर्नाटक होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष पीसी राव के मुताबिक, बेंगलुरु में Swiggy पर करीब 21 हजार होटल और रेस्टोरेंट रजिस्टर्ड हैं। इनमें से ज्यादातर प्रस्तावित बहिष्कार में शामिल हो सकते हैं। एसोसिएशन ने Swiggy को 15 अगस्त तक अपनी व्यवस्था सुधारने का समय दिया है।

राव ने बताया कि Swiggy के अधिकारियों के साथ दो से तीन बैठकें हो चुकी हैं। उनका कहना है कि तय कमीशन और जीएसटी के अलावा कोई अतिरिक्त रकम नहीं काटी जानी चाहिए।

बिना अनुमति काटे जा रहे कई चार्ज

रेस्टोरेंट संचालकों का आरोप है कि उनकी अनुमति के बिना डिस्काउंट, विज्ञापन शुल्क, लंबी दूरी की डिलीवरी का खर्च और कई दूसरे चार्ज उनके भुगतान से काट लिए जाते हैं।

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राव ने कहा कि अगर कोई रेस्टोरेंट एक दिन में 1,000 रुपये का कारोबार करता है तो उसे करीब 450 से 500 रुपये का ही भुगतान मिलता है। बाकी 50 से 55 प्रतिशत रकम अलग-अलग चार्ज में चली जाती है। एसोसिएशन की मांग है कि भुगतान की पूरी व्यवस्था साफ और पारदर्शी होनी चाहिए।

एसोसिएशन ने रखीं ये मांगें

होटल संचालक चाहते हैं कि ग्राहक की शिकायत के बाद होने वाली अपने आप कटौती बंद की जाए। खाना तैयार होने के बाद ऑर्डर रद्द होने पर रेस्टोरेंट को मुआवजा मिले। हर कटौती की जानकारी देने वाली विस्तृत सेटलमेंट रिपोर्ट दी जाए।

इसके अलावा एकतरफा कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें हटाने और हर रेस्टोरेंट के लिए एक अलग रिलेशनशिप मैनेजर नियुक्त करने की भी मांग की गई है।

दूसरे विकल्पों पर भी चल रही बातचीत

कर्नाटक के होटल Rapido के Ownly प्लेटफॉर्म और सीधे ग्राहकों से ऑर्डर लेने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। एसोसिएशन Flipkart से भी बातचीत कर रही है, जो फूड डिलीवरी कारोबार शुरू करने की तैयारी में है।

रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि वे डिलीवरी प्लेटफॉर्म के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कारोबार के लिए उचित और बराबरी वाला समझौता चाहते हैं। उनका कहना है कि प्लेटफॉर्म उनके बिजनेस पार्टनर हैं, रेस्टोरेंट के मालिक नहीं।

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बढ़ते कमीशन से कम हो रही कमाई

बेंगलुरु के कुछ रेस्टोरेंट संचालकों ने दावा किया कि पहले कमीशन 5 से 8 प्रतिशत था, जो धीरे-धीरे बढ़कर 15 से 20 प्रतिशत हो गया। इसके बाद प्रमोशनल डिस्काउंट और विज्ञापन शुल्क भी जुड़ गए, जिससे रेस्टोरेंट चलाना मुश्किल हो रहा है।

एसोसिएशन का कहना है कि अगर 15 अगस्त तक उचित समाधान नहीं निकला तो बेंगलुरु के होटल और रेस्टोरेंट Swiggy की सेवाएं बंद कर देंगे।