39 मेडल के साथ चौथे स्थान पर भारत, जानिए अगर शूटिंग और रेसलिंग होती तो कितने मेडल मिल सकते थे
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने सीमित खेलों के बावजूद 39 मेडल जीतकर चौथा स्थान हासिल किया। लेकिन शूटिंग, रेसलिंग, बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसे मजबूत खेल इस बार शामिल नहीं थे। पुराने प्रदर्शन के आंकड़े बताते हैं कि इन खेलों की वापसी भारत की मेडल टैली को काफी बदल सकती है।

In Short
- भारत ने CWG 2026 में 13 गोल्ड समेत कुल 39 मेडल जीतकर चौथा स्थान हासिल किया।
- शूटिंग रेसलिंग बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसे मजबूत खेल इस एडिशन में शामिल नहीं थे।
- इन खेलों की वापसी पर भारत का मेडल टैली 70 के पार पहुंच सकता है और तीसरे स्थान की रेस मजबूत हो सकती है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने सीमित खेलों के बावजूद शानदार प्रदर्शन करते हुए मेडल टेबल में चौथा स्थान हासिल किया। ग्लासगो में आयोजित इस एडिशन में केवल 10 खेल शामिल थे, इसलिए भारत के कई मजबूत मेडल इवेंट्स का हिस्सा नहीं बन सके। इसके बाद भी भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में दम दिखाया, लेकिन असली सवाल यह है कि अगर पुराने मजबूत खेल भी शामिल होते तो भारत का मेडल टैली कहां तक पहुंच सकता था।
39 मेडल के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत
भारत ने CWG 2026 में कुल 39 मेडल जीते। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। मेडल टेबल में भारत से आगे केवल ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा रहे।
सिर्फ 10 खेलों वाले इस एडिशन में चौथे स्थान पर रहना भारत के लिए मजबूत प्रदर्शन माना जा सकता है। हालांकि, फाइनल रैंकिंग भारत की पूरी स्पोर्टिंग पावर नहीं दिखाती, क्योंकि देश के चार बड़े मेडल जीतने वाले खेल इस बार शेड्यूल का हिस्सा नहीं थे।
चार खेल बाहर होने से कम हुए मेडल के मौके
शूटिंग, रेसलिंग, बैडमिंटन और टेबल टेनिस को ग्लासगो गेम्स में शामिल नहीं किया गया था। ये चारों खेल पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए बड़ी संख्या में मेडल लेकर आए हैं।
2018 के गोल्ड कोस्ट गेम्स में अकेले शूटिंग से भारत को 27 मेडल मिले थे। वहीं, 2022 के बर्मिंघम गेम्स में रेसलिंग ने 12, बैडमिंटन ने छह और टेबल टेनिस ने सात मेडल दिलाए थे।
इन चार खेलों ने हाल के एडिशन में मिलकर 52 मेडल दिए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 2026 में भारत के कितने बड़े मेडल मौके उपलब्ध ही नहीं थे।
सीधे 52 मेडल जोड़ना क्यों सही नहीं होगा?
पिछले प्रदर्शन के 52 मेडल को सीधे 2026 के 39 मेडल में जोड़ना सही तस्वीर नहीं देगा। हर एडिशन में खिलाड़ियों की फॉर्म, कॉम्पिटिशन का लेवल और क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड अलग होते हैं।
फिर भी पुराने आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि भारत की पारंपरिक ताकत का बड़ा हिस्सा ग्लासगो में इस्तेमाल नहीं हो पाया। इसके बावजूद दूसरे खेलों के खिलाड़ियों ने इस कमी को काफी हद तक पूरा किया।
बॉक्सिंग बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत
बॉक्सिंग ने भारत को सबसे ज्यादा 10 मेडल दिलाए, जिनमें सात गोल्ड शामिल थे। एथलेटिक्स में भी भारत ने अपने सबसे मजबूत कॉमनवेल्थ कैंपेन में से एक दर्ज किया।
वेटलिफ्टिंग, जूडो और पैरा स्पोर्ट्स ने भी मेडल टैली बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इससे साफ हुआ कि भारत अब केवल शूटिंग, रेसलिंग या बैडमिंटन जैसे पारंपरिक खेलों पर निर्भर नहीं है।
पूरे खेल लौटे तो 70 पार जा सकता है आंकड़
अगर शूटिंग, रेसलिंग, बैडमिंटन और टेबल टेनिस शामिल होते और भारतीय खिलाड़ी पिछले एडिशन जैसा प्रदर्शन दोहराते, तो भारत का मेडल टैली 70 के पार जा सकता था। ऐसी स्थिति में भारत कनाडा को तीसरे स्थान के लिए कड़ी टक्कर दे सकता था।
अब अगला बड़ा मौका 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में मिल सकता है, जिनका आयोजन अहमदाबाद में होने की उम्मीद है। घरेलू माहौल और पूरा स्पोर्ट्स प्रोग्राम मिलने पर भारत अपनी असली कॉमनवेल्थ ताकत दुनिया के सामने दिखा सकता है।

