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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा फैसला! 44 एग्जाम रद्द JSSC, CGL रद्द होने से भड़के उम्मीदवार

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार के एक बड़े फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। कई परीक्षाएं रद्द होने के बाद अब नौकरी पा चुके उम्मीदवार भी विरोध में उतर आए हैं। आखिर सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया और उम्मीदवार किस बात को लेकर नाराज हैं, जानिए पूरी कहानी।

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AI Generated Image

In Short

  • झारखंड सरकार ने 2014 से अब तक हुई JPSC JSSC और आउटसोर्स एजेंसी की 44 भर्ती परीक्षाएं रद्द कीं
  • JSSC CGL पास कर नौकरी पा चुके करीब 2000 उम्मीदवार फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे
  • भर्ती गड़बड़ी मामले में CID जांच तेज 22 आरोपी गिरफ्तार और सुधार के लिए कमेटी गठित

झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच बड़ा कदम उठाते हुए 2014 से अब तक हुई 44 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। इसमें झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा भी शामिल है। सरकार के इस फैसले के बाद अब नियुक्त हो चुके उम्मीदवार भी विरोध में उतर गए हैं और इसी फैसले को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है।

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25 दिन से चल रहे आंदोलन के बीच सरकार का फैसला

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का आंदोलन पिछले 25 दिनों से चल रहा है। JMM सरकार ने सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद मंगलवार देर रात आठ नोटिफिकेशन जारी कर 44 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया।

इन परीक्षाओं का आयोजन झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC और आउटसोर्स एजेंसी के जरिए कराया गया था। सरकार ने कहा कि भर्ती सिस्टम में भरोसा वापस लाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

कई बड़े पदों की भर्ती परीक्षाएं हुईं रद्द

रद्द की गई परीक्षाओं में ड्रग इंस्पेक्टर, सरकारी इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों के असिस्टेंट प्रोफेसर, सरकारी पॉलिटेक्निक के लेक्चरर, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसे पद शामिल हैं।

इसके अलावा सिविल जज जूनियर डिविजन, असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, डिप्टी कलेक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर और डेंटिस्ट की भर्ती परीक्षाएं भी रद्द की गई हैं। झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विस एग्जाम के कई चरणों के साथ फूड सेफ्टी ऑफिसर, चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर, फूड एनालिस्ट, एग्रीकल्चर ऑफिसर, जियोलॉजिस्ट और केमिस्ट जैसे पदों की परीक्षाएं भी इसमें शामिल हैं।

JSSC CGL पास उम्मीदवारों का विरोध शुरू

सरकार के फैसले के बाद करीब 2 हजार ऐसे उम्मीदवार सड़कों पर उतर आए, जिनकी नियुक्ति JSSC CGL परीक्षा पास करने के बाद अलग-अलग विभागों में हो चुकी थी।

मंगलवार को उम्मीदवारों ने राज्य सचिवालय से बिरसा चौक तक मार्च निकाला। उनका कहना है कि अगर किसी ने गड़बड़ी की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द नहीं की जानी चाहिए।

असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर कौशल कुमार ने कहा, "हमें बताएं हमारा अपराध क्या है। हमें बाहर मत करें।" उम्मीदवारों ने मामले की CBI जांच या किसी स्वतंत्र जांच की मांग की है।

सुधार के लिए कमेटी और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव

सरकार ने JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए हाई कोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग करने का फैसला लिया है।इसके साथ ही दोनों आयोगों में इंटरनल विजिलेंस सेल बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है, जो दो महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।यह कमेटी भर्ती प्रक्रिया की जांच करेगी और पेपर लीक, हेरफेर और दूसरी गड़बड़ियों को रोकने के उपाय सुझाएगी।

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CID जांच में तेजी आरोपी गिरफ्तार

भर्ती गड़बड़ी मामले की जांच भी तेज कर दी गई है। झारखंड CID ने मुख्य आरोपी अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और उसके भाई अक्षय तिवारी को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है।

अभय तिवारी को CID ने 22 जुलाई को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि तिवारी ने 13 साल में करीब 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। इनमें पुलिस, नेवी, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, CRPF और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स की परीक्षाएं शामिल थीं।

जांच अधिकारियों के मुताबिक तिवारी ने कथित तौर पर अलग-अलग परीक्षाओं में पास कराने के लिए 2 लाख रुपये से 70 लाख रुपये तक के "रेट चार्ट" की बात बताई है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी कोर्ट में नहीं हुई है।CID ने JSSC सचिव सुधीर गुप्ता से भी कई घंटे पूछताछ की है। इस मामले में अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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फैसले पर सियासत भी तेज

कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर परीक्षा रद्द करने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम छात्रों को निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया दिलाने में मदद करेगा।

वहीं विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर छात्रों को धोखा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग CBI जांच की थी, लेकिन सरकार ने केवल परीक्षाएं रद्द कर दीं।