scorecardresearch

पढ़ाई-परवरिश पर खर्च ₹25 लाख अब वापस करो! माता-पिता की मांग ने छेड़ी बहस, बेटे से रिश्ता तोड़ने तक की बात

वायरल दावे के मुताबिक, माता-पिता ने बेटे से 25 लाख रुपये लौटाने को कहा। उनका कहना था कि यह रकम उन्होंने उसकी परवरिश और पढ़ाई पर खर्च की थी। दावा है कि पैसे नहीं लौटाने पर उन्होंने बेटे से रिश्ते खत्म करने तक की बात कही।

Advertisement
AI Generated Image

कनाडा में रहने वाले एक भारतीय शख्स का अपने माता-पिता के साथ पैसों को लेकर विवाद सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बन गया है। वायरल दावे के मुताबिक, माता-पिता ने बेटे से 25 लाख रुपये लौटाने को कहा। उनका कहना था कि यह रकम उन्होंने उसकी परवरिश और पढ़ाई पर खर्च की थी। दावा है कि पैसे नहीं लौटाने पर उन्होंने बेटे से रिश्ते खत्म करने तक की बात कही।

advertisement

₹25 लाख की मांग से शुरू हुई बहस

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार में आर्थिक मदद को लेकर रिश्ते बिगड़ने के बाद माता-पिता ने बेटे से कहा कि वह परवरिश और पढ़ाई पर खर्च हुए 25 लाख रुपये वापस भेजे। इसके बाद ऑनलाइन बहस छिड़ गई कि क्या माता-पिता बच्चों की परवरिश पर हुए खर्च को बाद में कर्ज की तरह वापस मांग सकते हैं।

पैसों से जुड़ी हैं कई उम्मीदें

भारतीय परिवारों में माता-पिता और बच्चों के बीच आर्थिक मदद लंबे समय से आम रही है। माता-पिता बच्चों की पढ़ाई, शादी, घर और कई बार करियर में बदलाव तक के लिए आर्थिक मदद करते हैं। वहीं बच्चों से भी बाद में माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारी उठाने की उम्मीद की जाती है।

पढ़ाई पर बढ़ रहा परिवारों का खर्च

इस बहस का एक पहलू पढ़ाई की बढ़ती लागत भी है। ट्यूशन फीस के अलावा कोचिंग, ट्रांसपोर्ट, डिजिटल डिवाइस और दूसरी गतिविधियों पर होने वाला खर्च परिवारों का आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।

विदेश में पढ़ाई के मामले में यह दबाव और ज्यादा है। रुपये की कमजोरी और बढ़ती ट्यूशन फीस के कारण कई भारतीय छात्रों को पहले की योजना से ज्यादा कर्ज लेने की जरूरत पड़ रही है।

Parenting Cost: क्या परवरिश एक निवेश है?

सोशल मीडिया पर इस सवाल को लेकर अलग-अलग राय सामने आई। कई यूजर्स का कहना है कि बच्चे पैदा करने का फैसला माता-पिता का होता है, इसलिए उनकी परवरिश का खर्च बाद में कर्ज नहीं बन सकता। वहीं दूसरे लोगों का तर्क है कि माता-पिता अगर बच्चों के भविष्य के लिए अपनी आर्थिक सुरक्षा से समझौता करते हैं तो बड़े होने के बाद बच्चों की भी उनके प्रति जिम्मेदारी बनती है।

विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए नई चुनौती

यह मामला विदेश में रहने वाले युवा भारतीयों के सामने बदलती आर्थिक चुनौतियों को भी सामने लाता है। कई प्रोफेशनल अपने लोन, मकान और रिटायरमेंट की प्लानिंग के साथ भारत में माता-पिता की आर्थिक मदद भी कर रहे हैं। इसी वजह से परिवारों के भीतर पैसों और आर्थिक सीमाओं पर बातचीत अब ज्यादा खुलकर सामने आ रही है।

advertisement