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नरेंद्र मोदी के फोन कॉल की वजह से नहीं अटकी है भारत-यूएस ट्रेड डील! Howard Lutnick के दावों को भारत ने किया खारिज

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि इस पूरे मामले को जिस तरह पेश किया गया है, वह सही नहीं है। रणधीर जयसवाल ने कहा कि अमेरिकी मंत्री की टिप्पणी तथ्यों से मेल नहीं खाती।

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अमेरिका से आई टिप्पणी पर भारत ने साफ और सख्त जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन कॉल न होने की वजह से ट्रेड डील अटकी हुई है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि इस पूरे मामले को जिस तरह पेश किया गया है, वह सही नहीं है। रणधीर जयसवाल ने कहा कि अमेरिकी मंत्री की टिप्पणी तथ्यों से मेल नहीं खाती।

जायसवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय ट्रेड डील पर बातचीत 13 फरवरी 2024 से लगातार चल रही है। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। उनका कहना था कि दोनों पक्ष एक संतुलित और दोनों के लिए फायदेमंद समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं और कई बार डील के काफी करीब भी पहुंचे हैं।

उन्होंने कहा कि इन चर्चाओं को जिस तरह से बयान में दिखाया गया है, वह सटीक नहीं है। भारत और अमेरिका, दोनों एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं और हम एक पारस्परिक रूप से लाभकारी ट्रेड एग्रीमेंट में आज भी दिलचस्पी रखते हैं।

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संवाद की कमी का दावा भी गलत है। जायसवाल के मुताबिक, साल 2025 में अब तक दोनों नेताओं के बीच आठ बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। इन बातचीतों में भारत-अमेरिका संबंधों के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा हुई है।

इससे पहले अमेरिकी वाणिज्य मंत्री Howard Lutnick ने दावा किया था कि भारत पर अमेरिका के सख्त टैरिफ रुख के पीछे व्यापार से ज्यादा निजी नाराजगी है। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सीधे बातचीत न करने से राष्ट्रपति ट्रंप नाराज हुए, जिसके बाद भारत पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया गया और आगे भी शुल्क बढ़ने का खतरा बना हुआ है। भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि ट्रेड डील पर बातचीत जारी है और दोनों देश इसे जल्द पूरा करने के इच्छुक हैं।