Diljit Dosanjh की ‘सतलुज’ पर सरकार सख्त, अवैध स्क्रीनिंग पर होगा एक्शन
ZEE5 से हटाए जाने के बाद भी दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज’का विवाद थम नहीं रहा है। बिना सेंसर सर्टिफिकेट और सुझाए गए 127 कट्स के फिल्म दिखाने का दावा है। अब पायरेटेड स्क्रीनिंग पर सरकार सख्त हो गई है और मेकर्स से लेकर आयोजकों तक पर कार्रवाई की तैयारी है।

In Short
- फिल्म सतलुज में 127 कट्स लगाने की सलाह दी गई थी लेकिन मेकर्स ने बदलाव नहीं किए।
- इसके बाद फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला था फिर भी इसे ZEE5 पर स्ट्रीम किया गया।
- अब अवैध स्क्रीनिंग करने वालों और मेकर्स के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
Diljit Dosanjh Satluj Film: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। फिल्म को भले ही ZEE5 से हटा दिया गया हो लेकिन इसकी डाउनलोड की गई और पायरेटेड कॉपियां अब भी कई जगह दिखाई जा रही हैं। अब सरकार ऐसी स्क्रीनिंग करने वालों और फिल्म के मेकर्स के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
फिल्म को 3 अप्रैल को अचानक ZEE5 पर स्ट्रीम किया गया था। हालांकि करीब 48 घंटे बाद इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इस दौरान कई लोगों ने फिल्म डाउनलोड कर ली थी। इसके बाद अलग-अलग जगहों पर इसकी कॉपी दिखाए जाने की खबरें सामने आईं।
फिल्म में लगाने थे 127 कट्स
सूत्रों के मुताबिक रेगुलेटिंग बॉडी ने फिल्म में कुल 127 कट्स लगाने के लिए कहा था। इसके बावजूद मेकर्स ने फिल्म में सुझाए गए बदलाव नहीं किए। फिल्म को सेंसर बोर्ड की तरफ से सर्टिफिकेट भी नहीं मिला था लेकिन फिर भी इसे स्ट्रीम कर दिया गया।
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बताया जा रहा है कि बिना सर्टिफिकेट और बिना जरूरी कट्स के फिल्म रिलीज करने के मामले में सरकार मेकर्स के खिलाफ एक्शन लेने की योजना बना रही है। जिन जगहों पर फिल्म की स्क्रीनिंग हो रही है वहां भी संबंधित राज्य सरकारों को कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
पहले ‘पंजाब 95’ था फिल्म का नाम
‘सतलुज’ का नाम पहले ‘पंजाब 95’ रखा गया था। यह फिल्म पिछले चार साल से सेंसर सर्टिफिकेट के कारण अटकी हुई थी। बाद में इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया गया।
फिल्म को ZEE5 इंटरनेशनल से भी हटा लिया गया है। सरकार का कहना है कि फिल्म के कुछ सीन देश की अखंडता पर गलत असर डाल सकते हैं। फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है।
जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी पर बनी फिल्म
फिल्म में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी दिखाई गई है। उन्होंने पंजाब में 1980 और 1990 के दशक के दौरान उग्रवाद और 25 हजार कथित अवैध अंतिम संस्कारों से जुड़ी जानकारी सामने रखी थी।
दिलजीत दोसांझ के लिए यह फिल्म भावनात्मक और शारीरिक रूप से काफी मुश्किल रही। दिलजीत के मुताबिक शूटिंग पूरी होने के बाद उन्हें खुद को संभालने के लिए कुछ समय का ब्रेक लेना पड़ा था।
दोबारा रिलीज की उठ रही मांग
विवाद के बीच फिल्म को दोबारा रिलीज करने की मांग भी तेज हो रही है। भारत के साथ पाकिस्तान में भी फिल्म दिखाने की मांग की जा रही है। कई पाकिस्तानी कलाकारों ने फिल्म को रोके जाने का विरोध करते हुए दिलजीत दोसांझ और उनकी फिल्म का समर्थन किया है।

