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अमेरिकी जांच में बड़ा मोड़! गौतम अडाणी और सागर अडाणी ने SEC को 18 मिलियन डॉलर देने पर मानी सहमति

अडाणी ग्रीन एनर्जी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि दोनों ने न्यूयॉर्क की US Eastern District Court में अंतिम फैसले के लिए सहमति याचिका दाखिल की है। कंपनी ने बताया कि दोनों ने आरोप स्वीकार या खारिज किए बिना समझौते पर सहमति दी है।

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गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी ने अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के साथ समझौते के तहत कुल 18 मिलियन डॉलर का सिविल पेनल्टी भुगतान करने पर सहमति जताई है।

फेडरल कोर्ट में गुरुवार को दाखिल प्रस्तावित समझौते के मुताबिक गौतम अडाणी 6 मिलियन डॉलर और सागर अडाणी 12 मिलियन डॉलर का भुगतान करेंगे। हालांकि यह समझौता अभी अदालत की मंजूरी के अधीन है।

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अडाणी ग्रीन एनर्जी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि दोनों ने न्यूयॉर्क की US Eastern District Court में अंतिम फैसले के लिए सहमति याचिका दाखिल की है। कंपनी ने बताया कि दोनों ने आरोप स्वीकार या खारिज किए बिना समझौते पर सहमति दी है।

SEC ने 2024 में लगाया था रिश्वत और गलत जानकारी देने का आरोप

अमेरिकी SEC ने नवंबर 2024 में केस दायर किया था। एजेंसी का आरोप था कि गौतम अडाणी ने भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने या उसका वादा करने की कोशिश की ताकि अडाणी ग्रीन की सोलर प्रोजेक्ट के लिए कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए जा सकें।

SEC ने यह भी आरोप लगाया था कि गौतम और सागर अडाणी ने 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड ऑफरिंग के दौरान कंपनी की एंटी-ब्राइबरी नियमों के पालन को लेकर गलत और भ्रामक बयान दिए। उस समय SEC ने कहा था कि Adani Green ने अमेरिकी निवेशकों से कम से कम 175 मिलियन डॉलर जुटाए थे।

हालांकि SEC ने अडाणी समूह या उसकी कॉर्पोरेट इकाइयों पर मुकदमा नहीं किया था। कंपनी ने उस समय अमेरिकी आरोपों से इनकार किया था।

अमेरिकी न्याय विभाग भी केस वापस लेने की तैयारी में

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी न्याय विभाग संबंधित आपराधिक मामले में गौतम अडाणी के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप वापस लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाक्रमों से अडाणी समूह को अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में दोबारा आसानी से पहुंच बनाने और विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

पहले अधिकार क्षेत्र को लेकर उठाए थे सवाल

गौतम अडाणी के वकीलों ने पहले SEC के केस को खारिज करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि अमेरिकी एजेंसियों का अधिकार क्षेत्र लागू नहीं होता और कथित बयान कानूनी रूप से कार्रवाई योग्य नहीं थे।