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पायलटों के डोप टेस्ट के लिए ओरल फ्लूइड टेस्ट पर FIP ने DGCA को लिखा पत्र, टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने की मांग

भारत में पायलटों के डोप टेस्ट को लेकर नई मांग उठी है। फेडरेशन ऑफ इंडिया पायलट्स ने DGCA को पत्र लिखकर यूरिन टेस्ट के साथ ओरल फ्लूइड टेस्टिंग पर विचार करने को कहा है। संगठन का कहना है कि इससे जांच क्षमता बढ़ेगी और एयरपोर्ट पर टेस्टिंग प्रक्रिया तेज हो सकेगी।

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AI Generated Image

In Short

  • FIP ने DGCA से पायलटों के लिए ओरल फ्लूइड डोप टेस्ट शुरू करने पर विचार करने की मांग की
  • संगठन ने कहा मौजूदा यूरिन टेस्ट सिस्टम के साथ नई टेस्टिंग मेथड से क्षमता बढ़ेगी
  • एयर इंडिया AI2379 मामले के बाद पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस जांच पर चर्चा तेज हुई

फेडरेशन ऑफ इंडिया पायलट्स (FIP) ने पायलटों के डोप टेस्ट की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को पत्र लिखा है। FIP ने मौजूदा यूरिन टेस्ट सिस्टम के साथ ओरल फ्लूइड टेस्टिंग को भी शामिल करने पर विचार करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि भारत में बढ़ते एविएशन ऑपरेशन को देखते हुए अतिरिक्त टेस्टिंग तरीके जरूरी हो गए हैं।

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FIP ने ओरल फ्लूइड टेस्टिंग को शामिल करने की मांग की

FIP ने DGCA से कहा है कि पायलटों के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस की जांच करने वाले मौजूदा नियमों में ओरल फ्लूइड टेस्टिंग को एक अतिरिक्त तरीका बनाया जा सकता है। संगठन के अनुसार, इससे टेस्टिंग क्षमता बढ़ेगी और एयरपोर्ट समेत अन्य ऑपरेशनल जगहों पर तेजी से जांच करना आसान होगा।

मौजूदा यूरिन टेस्ट सिस्टम के साथ बढ़ेगी क्षमता

FIP ने अपने पत्र में कहा कि मौजूदा यूरिन टेस्टिंग सिस्टम के लिए पहले से रेगुलेटरी और लैब फ्रेमवर्क मौजूद है। हालांकि, भारतीय एविएशन सेक्टर के तेजी से विस्तार को देखते हुए नए टेस्टिंग तरीकों की जरूरत महसूस हो रही है, जिससे ज्यादा संख्या में पायलटों की जांच की जा सके।

एयरपोर्ट पर तेजी से हो सकेगी जांच

संगठन का मानना है कि ओरल फ्लूइड टेस्टिंग को शामिल करने से ऑपरेशनल डिस्टर्बेंस कम किया जा सकता है। इसके अलावा एयरपोर्ट और दूसरी ऑपरेशनल लोकेशन पर जरूरत के समय जल्दी टेस्टिंग करना भी संभव हो सकेगा।

एयर इंडिया फ्लाइट मामले के बाद उठी मांग

FIP का यह पत्र एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 के पायलट इन कमांड (PIC) के कथित तौर पर मारिजुआना टेस्ट पॉजिटिव आने की खबर के बाद आया है। इस मामले के बाद पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस जांच को लेकर चर्चा तेज हुई है।

DGCA के मौजूदा नियमों में बदलाव पर विचार

FIP ने DGCA से मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत ओरल फ्लूइड टेस्टिंग को एक कंप्लीमेंटरी टेस्टिंग मेथड के तौर पर शामिल करने पर विचार करने को कहा है। संगठन का कहना है कि इससे एविएशन सेक्टर में सुरक्षा जांच को और मजबूत किया जा सकेगा।