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बारिश की कमी से बिजली पर दबाव, El Niño ने बिगाड़ा भारत के हाइड्रो पावर का गणित

El Niño के असर और कमजोर मानसून ने भारत के हाइड्रो पावर उत्पादन पर दबाव बढ़ा दिया है।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कम बारिश के कारण जलाशयों और नदियों का जलस्तर घट रहा है, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है। लगातार चौथे महीने गिरावट की आशंका के बीच बढ़ती बिजली मांग भी चिंता बढ़ा रही है।

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In Short

  • कमजोर मानसून और कम जलस्तर के कारण भारत में हाइड्रो पावर उत्पादन लगातार चौथे महीने घटने की संभावना है।
  • ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कम बारिश से जलाशयों और नदियों का स्तर प्रभावित हुआ है, जबकि बिजली की मांग और बढ़ गई है।
  • हाइड्रो पावर देश की बिजली क्षमता का करीब 11% हिस्सा है, लेकिन मौसम पर निर्भरता से उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

भारत में कमजोर मानसून और कम जलस्तर का असर अब हाइड्रो पावर उत्पादन पर दिखने लगा है।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, देश में जलविद्युत उत्पादन लगातार चौथे महीने गिरने की संभावना है, क्योंकि कम बारिश के कारण जलाशयों और नदियों का स्तर नीचे बना हुआ है।

पावर मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, 29 अगस्त तक हाइड्रो पावर उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब 12 फीसदी कम रहा है। कमजोर मानसून के कारण बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ रहा है।

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El Niño से कमजोर हुई बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले महीने बारिश सामान्य औसत से 16 फीसदी से ज्यादा कम रही। इसकी वजह मजबूत होते El Niño प्रभाव को माना जा रहा है, जिसने देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बनाए हैं।

कम बारिश के कारण तापमान भी ज्यादा बना हुआ है। वहीं, किसान सिंचाई के लिए ज्यादा बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बिजली की मांग बढ़ी है और शाम के समय जब सोलर पावर उत्पादन कम होता है, तब छोटी अवधि की कमी देखने को मिल रही है।

जून में हाइड्रो पावर उत्पादन में बड़ी गिरावट

भारत में जून का महीना 12 साल में सबसे सूखा रहा था। इसका असर हाइड्रो पावर उत्पादन पर भी पड़ा और इसमें 21 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह फरवरी 2024 के बाद सबसे बड़ी गिरावट थी।

जुलाई में बारिश की स्थिति में कुछ सुधार हुआ, लेकिन अगस्त में फिर कमजोरी देखने को मिली। जून से सितंबर तक चलने वाले मानसून सीजन के आखिरी महीने में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान है।

अब तक मानसून में 14 फीसदी की कमी के कारण मिट्टी में नमी और जलाशयों के स्तर पर असर पड़ा है, जिससे हाइड्रो पावर उत्पादन का आउटलुक कमजोर हुआ है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

पिछले साल की ज्यादा बारिश का भी असर

इस साल हाइड्रो पावर उत्पादन में गिरावट की एक वजह पिछले साल का ऊंचा आधार भी है। 2025 में अच्छी बारिश के कारण बांधों से ज्यादा बिजली उत्पादन हुआ था।

भारत अपने गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों को बढ़ाने के लिए हाइड्रो पावर को अहम मानता है। हालांकि, मौसम पर निर्भरता और बांध निर्माण से जुड़ी पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों के कारण इसकी रफ्तार धीमी रही है।

देश की बिजली क्षमता में हाइड्रो का अहम योगदान

हाइड्रो पावर देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का करीब 11 फीसदी हिस्सा है। पिछले एक दशक में भारत की हाइड्रो पावर क्षमता करीब 20 फीसदी बढ़ी है, लेकिन यह सोलर, अन्य रिन्यूएबल और न्यूक्लियर ऊर्जा स्रोतों की तुलना में धीमी गति है।

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देश की करीब 52 गीगावाट हाइड्रो क्षमता में बड़ा हिस्सा रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट्स का है, जो बड़े जलाशयों की जगह प्राकृतिक नदी प्रवाह पर निर्भर करते हैं।

हिमालयी क्षेत्र की परियोजनाओं को गर्मियों में बर्फ पिघलने से मदद मिलती है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में हाइड्रो पावर उत्पादन ज्यादा बारिश पर निर्भर रहता है।