ट्रेनें रद्द, मोबाइल इंटरनेट बंद और UPI भी ठप! दिल्ली में CJP प्रदर्शन के बीच रेलवे स्टेशन पर फंसे यात्री
दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच रेलवे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक के बाद एक ट्रेनें रद्द होने की घोषणाएं होती रहीं। कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट बंद होने से UPI पेमेंट और ट्रेन अपडेट मिलना भी मुश्किल हो गया। आखिर रेलवे ने इतनी ट्रेनें क्यों रद्द कीं और स्टेशन पहुंचे यात्रियों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ा?

In Short
- दिल्ली में CJP प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों के बीच 170 से ज्यादा ट्रेनें रद्द होने की जानकारी सामने आई।
- मोबाइल इंटरनेट बंद होने से कुछ यात्रियों को UPI पेमेंट और ट्रेन की स्थिति जानने में परेशानी हुई।
- नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों से जुड़ी ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं, जबकि कई सड़कों पर आवाजाही सीमित रही।
दिल्ली में Cockroach Janta Party (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों का असर शनिवार, 10 अक्टूबर को आम यात्रियों पर भी पड़ा। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों से जुड़ी बड़ी संख्या में ट्रेनें रद्द होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद होने से UPI पेमेंट और ट्रेनों की जानकारी हासिल करना भी मुश्किल हो गया।

ट्रेन रद्द हुई, इंटरनेट बंद होने से पेमेंट भी अटका
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर वाराणसी जाने वाले 23 वर्षीय अभिनव की परेशानी उस समय बढ़ गई, जब उन्हें पता चला कि उनकी ट्रेन रद्द हो गई है। अभिनव अपना वॉलेट घर भूल आए थे। उन्होंने स्टेशन पर नींबू सोडा खरीदा, लेकिन मोबाइल इंटरनेट बंद होने के कारण UPI से भुगतान नहीं कर सके।
इंडिया टुडे डिजिटल से बातचीत में अभिनव ने बताया कि इंटरनेट नहीं चलने से मोबाइल पेमेंट करना संभव नहीं था। उन्हें ट्रेन रद्द होने की पहले से जानकारी भी नहीं मिली थी।
रेलवे स्टेशन पर एक के बाद एक ट्रेनें रद्द होने की घोषणा

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लगातार ट्रेनों के रद्द होने की घोषणाएं की जा रही थीं। वाराणसी जाने वाली ट्रेन के बाद पुणे एक्सप्रेस को भी रद्द करने की घोषणा हुई।
इंडिया टुडे डिजिटल से बातचीत में रेलवे के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि शनिवार को 170 से ज्यादा ट्रेनें रद्द की गई थीं। अचानक ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बदलनी पड़ी।
रेलवे ने क्यों रद्द कीं इतनी ट्रेनें?

रेल मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को रेलवे जोन को भेजे पत्र में दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम की आशंका जताई थी।
इसके बाद 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया गया।
रेलवे के मुताबिक, प्रदर्शन और सड़क पाबंदियों के कारण स्टेशनों तक पहुंचने में यात्रियों को परेशानी हो सकती थी। इससे पहले 8 अक्टूबर को भी दिल्ली में ट्रैफिक जाम और सड़क अवरोधों के कारण 5,000 से ज्यादा यात्रियों की ट्रेनें छूट गई थीं।
इंटरनेट बंद होने से UPI और ट्रेन अपडेट पर असर
मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद होने से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
कई यात्री डिजिटल भुगतान नहीं कर पा रहे थे। इसके अलावा इंटरनेट बंद होने के कारण ट्रेन की स्थिति और रद्द होने की जानकारी भी समय पर नहीं मिल रही थी।
हालांकि, मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध दिल्ली के कुछ चुनिंदा इलाकों में लागू था, पूरी राजधानी में नहीं।
रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों की भी हुई जांच
सुरक्षा व्यवस्था के तहत जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई थी। कई सड़कों पर आवाजाही सीमित कर दी गई।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले यात्रियों के पहचान पत्र भी जांचे जा रहे थे। पुलिस यात्रियों की पहचान सुनिश्चित करने के बाद ही उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति दे रही थी।
इससे स्टेशन पहुंचने वाले लोगों को अतिरिक्त जांच और रास्तों में बदलाव का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन के बीच कई लोग हिरासत में
CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
प्रदर्शन से पहले CJP नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत पाबंदियां लागू की थीं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा परेशानी उन आम यात्रियों को हुई, जिनका प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं था। ट्रेनें रद्द होने, सड़कों पर पाबंदियों और मोबाइल इंटरनेट बंद होने से कई लोग स्टेशन पर फंस गए। कुछ यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जबकि दूसरों को अपनी यात्रा के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े।

