
नेपाल बाढ़ के बाद चीन की सख्ती, गिरोंग पोर्ट की तस्वीरें दिखाने पर क्यों हो रही कार्रवाई?
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ और मडस्लाइड के बाद चीन के सूचना नियंत्रण पर सवाल उठ रहे हैं। गिरोंग पोर्ट से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो को हटाने के आरोपों के बीच चीन ने कथित अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की है। मौतों के आंकड़ों को लेकर भी विवाद जारी है।

In Short
- चीन की साइबर पुलिस ने अफवाह फैलाने के 10 मामले पकड़े।
- सरकारी आंकड़ों से अलग मौत या लापता संख्या लिखने पर कार्रवाई हुई।
- चीनी law में 10 दिन हिरासत और 1000 युआन जुर्माना संभव।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और मडस्लाइड के बाद चीन के सूचना नियंत्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि चीन वही रवैया अपना रहा है, जो उसने कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में अपनाया था। उस समय वुहान से शुरू हुई महामारी को लेकर स्थानीय डॉक्टरों और नागरिकों की आवाज दबाने के आरोप लगे थे।
गिरोंग पोर्ट की तस्वीरें और वीडियो हटाने का आरोप
तिब्बत के गिरोंग पोर्ट पर आई प्राकृतिक आपदा की भयावह तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया से तेजी से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की ओर से शेयर किए गए कई वीडियो और क्लिप्स गायब हो रहे हैं।
वहीं, चीन का सरकारी मीडिया केवल बचाव अभियान और आधिकारिक तस्वीरों को ही दिखा रहा है। चीन अपनी छवि को लेकर इतना सतर्क है कि आपदा से जुड़ी कई जानकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।
साइबर पुलिस ने की कार्रवाई
चीन की साइबर सुरक्षा पुलिस ने दक्षिण-पश्चिम चीन के तिब्बत में गिरोंग पोर्ट पर हुए लैंडस्लाइड से जुड़ी कथित अफवाहों के मामलों में 10 मामलों का खुलासा करने का दावा किया है।

चीनी अधिकारियों का कहना है कि कुछ लोग आपदा को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं, मृतकों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बता रहे हैं और लोगों को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे मामलों में 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
मौतों के आंकड़ों को लेकर विवाद
चीन में अगर कोई व्यक्ति आपदा में मरने वालों की संख्या सरकारी आंकड़ों से अलग बताता है तो उस पर एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं। ऐसे मामलों में जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
चीनी कानून के अनुसार, आपदा से जुड़ी जानबूझकर अफवाह फैलाने पर 10 दिन तक हिरासत और 1000 युआन तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में 3 से 7 साल तक की जेल भी संभव है।
एक मामले में साइबर सुरक्षा पुलिस ने दावा किया कि ‘क्यू’ नाम के इंटरनेट यूजर ने बिना सबूत के यह लिखा कि खबरों में 1400 मौतों की बात कही गई है, जबकि असल में 3000 लोग लापता हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उस पर प्रशासनिक जुर्माना लगाया।
तिब्बत को लेकर चीन क्यों सतर्क?
तिब्बत चीन के लिए लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। 1950 के दशक से चीन के नियंत्रण में रहे तिब्बत में किसी भी घटना को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाता है।
चीन को डर है कि आपदा की असली तस्वीरें और स्थानीय लोगों की आवाज बाहर आने से उसकी नीतियों और विकास योजनाओं पर सवाल उठ सकते हैं। खासतौर पर हिमालयी क्षेत्रों में बन रहे बांधों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा बढ़ सकती है।
आपदा को लेकर नैरेटिव कंट्रोल
चीन का कहना है कि यह आपदा नेपाल की तरफ से शुरू हुई और तिब्बत से जुड़ी कई दावों को वह गलत जानकारी बता रहा है। चीन नहीं चाहता कि नुकसान का वास्तविक पैमाना सामने आए, क्योंकि इससे सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है।
सूचना नियंत्रण की वजह से प्रभावित परिवारों को भी अपने रिश्तेदारों की जानकारी मिलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। तिब्बत, ताइवान और हॉन्गकॉन्ग जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चीन में सेंसरशिप पहले से चर्चा का विषय रही है और अब इस आपदा में भी आधिकारिक आंकड़ों और सरकार के पक्ष को ही प्रमुखता मिल रही है।

