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BT Infra Summit 2026: मिनरल सिक्योरिटी पर समझौता नहीं! सेमीकंडक्टर, बैटरी और ऊर्जा सुरक्षा में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

BT Infrastructure Summit – Infra India 2047 में केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि जरूरी मिनरल्स में आत्मनिर्भर बनना भारत के लिए बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि लिथियम, कोबाल्ट और दूसरे जरूरी कच्चे पदार्थों की मजबूत सप्लाई देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा जरूरतों और सुरक्षा से जुड़ी है।

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दुनिया में बढ़ते तनाव और बदलते हालात के बीच जरूरी मिनरल्स की सुरक्षित सप्लाई भारत के लिए बड़ी प्राथमिकता बन गई है। केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि मिनरल सिक्योरिटी अब केवल कारोबार या उद्योग से जुड़ा मुद्दा नहीं है। इसका सीधा संबंध देश की आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से है।

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BT Infrastructure Summit में बोलते हुए रेड्डी ने कहा कि मिनरल्स के मामले में आत्मनिर्भर बनना सरकार के लिए ऐसा लक्ष्य है, जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

सेमीकंडक्टर से बैटरी तक जरूरी हैं मिनरल्स

रेड्डी ने कहा कि भारत जरूरी मिनरल्स की सप्लाई सुरक्षित किए बिना दुनिया का बड़ा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं बन सकता। इसी तरह लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट के बिना बैटरी बनाना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत को अपने क्लीन एनर्जी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कॉपर, निकेल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की भी जरूरत होगी। हाल के वैश्विक घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में मजबूत सप्लाई चेन और आत्मनिर्भरता की जरूरत और बढ़ गई है।

माइंस को जल्द शुरू करने पर जोर

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए देश में मिनरल्स की खोज तेज करनी होगी। जिन माइंस की पहचान हो चुकी है, उनमें काम जल्द शुरू करना होगा और प्राइवेट कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देना होगा।

इसके साथ ही माइनिंग के लिए नई तकनीक अपनाने और मिनरल्स की खोज से लेकर उनके इस्तेमाल तक पूरी सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की जरूरत है। इससे भारत को दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

कोयला सेक्टर में बढ़ी प्राइवेट भागीदारी

रेड्डी ने कहा कि सरकार ने कोयला सेक्टर को बंद व्यवस्था से निकालकर प्रतिस्पर्धी और निवेश के लिए बेहतर क्षेत्र बनाया है। कमर्शियल कोल माइनिंग शुरू होने से प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी बढ़ी है। इससे उत्पादन, कामकाज की रफ्तार और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में सुधार हुआ है।

उन्होंने बताया कि कोयला सेक्टर में ऑटोमैटिक रूट के जरिए 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति भी दी गई है। सरकार का लक्ष्य ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां निवेश बढ़े और उत्पादन व्यवस्था ज्यादा बेहतर हो सके।

एआई और ड्रोन से होगी मिनरल्स की खोज

माइंस मिनिस्ट्री मिनरल्स की खोज और माइंस के बेहतर संचालन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सैटेलाइट मैपिंग और आधुनिक जियोस्पेशियल तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। इनसे माइंस की योजना बनाने और काम के दौरान सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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इसके साथ सरकार बड़े स्तर पर कोल गैसिफिकेशन में भी निवेश कर रही है। इसके जरिए कोयले से सिंथेटिक गैस, मेथनॉल और केमिकल बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल तैयार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे कोयले की उपयोगिता बढ़ेगी और साफ औद्योगिक विकास को भी सहारा मिलेगा।